ओलंपिक में प्रदर्शन के आधार पर देश की स्थिति शीर्ष दस के आसपास भी नहीं है, लेकिन डोपिंग के दागियों की पहले दस देशों की सूची में भारत बरकरार रहेगा। साल 2018-19 में नाडा की सैंपलिंग में डोप फंसने वालों का फंसने वालों का आंकड़ा आंकड़ा 111 पहुंच गया है।
इनमें वेटलिफ्टिंग (357 सैंपलों में 23 खिलाड़ी फंसे) पहले, जबकि एथलेटिक्स (15) दूसरे नंबर पर है। वाडा की ओर से साल 2018 के डोप आंकड़ों की गणना में देश को शर्मिंदगी उठानी पड़ सकती है। साल 2016 की वाडा सूची में भारत 69 डोप पॉजिटिव मामलों के साथ संयुक्त छठे स्थान पर था। इससे पहले के तीन वर्षों (2013 से 2015) में भारत इस सूची में लगातार तीसरे स्थान पर रहा। 2015 में 117 मामले सामने आए थे।
नए खेलों में डोप के दागी
नाडा ने चार हजार तीन सौ 48 सैंपल लिए, इनमें सर्वाधिक एक हजार 20 सैंपल एथलीटों के हैं। इस बार नए खेलों में डोप के दागी सामने आए हैं। टेनिस, मोटर स्पोर्ट्स, तीरंदाजी, घुड़सवारी, फेसिंग, रोइंग (एक-एक), शूटिंग, गोल्फ, ताइक्वांडो(दो-दो), हैंडबाल (तीन), वूशु, कनोइंग क्याकिंग (चार-चार) ऐसे खेल हैं, जिनमें बीते वर्ष डोप पॉजिटिव मामले नहीं थे।
बॉक्सिंग में 293 सैंपल में दो, साइकिलिंग में 276 में से तीन, बॉडी बिल्डिंग में 135 में 13, पॉवरलिफ्टिंग में 67 में से आठ, कुश्ती में 226 में से चार, जूडो में 111 में से छह, कबड्डी में 143 में से पांच हॉकी में 135 में से एक, तैराकी में 143 सैंपलों में एक खिलाड़ी डोप में फंसा है। वाडा की साल 2017 और 2018 की सूची आना बाकी है, इसमें भी देश को राहत नहीं मिलने वाली है। 2017 में 73 और 2018 में कुल 102 खिलाड़ी डोप में फंसे हैं।