देश को बीजिंग और लंदन ओलंपिक में पदक दिलाकर बुलंदियों पर पहुंची बॉक्सिंग गर्त में जाने को तैयार है। आईबा ने बुधवार को भारतीय दल के किसी भी ऑफिशियल (रेफरी, जज, मैनेजर) के अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में भाग लेने पर रोक लगा दी है। हालांकि आईबा ने 19 दिसंबर से बाकू (अजरबैजान) में होने जा रहे अगालारोव कप में यूथ बॉक्सरों को प्रशिक्षकों समेत भाग लेने की अनुमति दे दी है। लेकिन यह भी कह दिया है कि कोई भी ऑफिशियल साथ नहीं जाएगा।
बॉक्सरों के भविष्य पर संकट का बड़ा कारण आईबा की ओर से अभय चौटाला व मुरलीधरन राजा की अगुवाई वाली पुरानी आईबीएफ को मान्यता देना है। आईबा ने यह साफ कर दिया है कि वह चौटाला के बहनोई अभिषेक मटोरिया व राजेश भंडारी वाली नई फेडरेशन से बात नहीं करेंगे। वह पुरानी फेडरेशन से ही बात करेंगे। लेकिन चौटाला यह काम नहीं करने जा रहे हैं। उनका कहना है कि नई फेडरेशन इस मामले में आईबा से बात कर उन्हें समझाने का प्रयास करेगी। पुरानी फेडरेशन बीते दिनों की बात हो गई है।
दरअसल आईओसी ने भी विजय मल्होत्रा व रंधीर सिंह की अगुवाई वाली पुरानी आईओए को मान्यता दे रखी है। अगर चौटाला आईबा का यह आदेश मानते हैं। तो उन्हें आईओसी के आदेश को भी मानते हुए आईओए भवन खाली करना होगा। इस वक्त विजेंदर, विकास, जय भगवान जैसे बॉक्सर एनआईएस पटियाला में यूरोपीय दौरे की तैयारियों में व्यस्त हैं।
लेकिन नई फेडरेशन की ओर से पुरानी को बात करने की मान्यता नहीं देने पर बॉक्सरों के किसी भी विदेशी दौरे को मंजूरी मिलने का कोई अवसर नहीं है। आईबा ने कड़े शब्दों में कहा है कि वह नए चुनाव नहीं होने तक पुरानी फेडरेशन से ही बात करेंगे। प्रत्येक अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए बॉक्सिंग फेडरेशन को आईबा की अनुमति लेनी पड़ सकती है। लेकिन यह तभी संभव होग जब पुरानी फेडरेशन के अध्यक्ष या सेक्रेटरी जनरल उनसे बात करेंगे।