अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति से भारत के निलंबित होने के एक दिन बाद खेलमंत्री जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि इस मामले में दखल देना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है लेकिन वह प्रतिबंध हटाने के लिये आईओसी से बात करेंगे ।
भारतीय ओलंपिक संघ को इस शर्मिंदगी के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए सिंह ने कहा कि आईओए यदि अपने संविधान में बदलाव करके उम्र और कार्यकाल संबंधी सरकारी दिशा निर्देश लागू कर देता तो निलंबन से बचा जा सकता था ।
गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ (आईओसी) ने कल भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) को सस्पेंड करने का फैसला किया था।
ओलंपिक चार्टर के उल्लंघन और आईओए चुनावों में सरकारी हस्तक्षेप के चलते खेलों की इस वैश्विक संस्था ने यह फैसला लिया। हालांकि इसकी आधिकारिक घोषणा अब तक नहीं की गई है। यह आईओसी कार्यकारी बोर्ड की पहले दिन की बैठक खत्म होने के बाद की जाएगी।
निलंबन रहने तक भारत ओलंपिक खेलों में हिस्सा नहीं ले सकेगा और न ही उसे आईओसी की तरफ से कोई वित्तीय सहायता मिलेगी। इसके अलावा आईओए के अधिकारी आईओसी की किसी बैठक या इवेंट में भाग नहीं ले सकेंगे।
खेल मंत्रालय के स्पोर्ट्स कोड के तहत चुनाव कराने के आईओए के फैसले के बाद से ही इसकी आशंका जताई जा रही थी। आईओसी लगातार इस संबंध में चेतावनी दे रही थी कि आईओए के काम में सरकारी हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा क्योंकि यह ओलंपिक चार्टर का उल्लंघन है।
इसके बावजूद आईओए ने यह कहते हुए आगे कदम बढ़ाया कि वह दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले से बंधे हुए हैं। निलंबन के फैसले को केंद्रीय खेल मंत्री जितेंद्र सिंह, आईओए के कार्यवाहक अध्यक्ष विजय कुमार मल्होत्रा और आईओए चुनावों से पहले निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए अभय सिंह चौटाला बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।