विवाद से दुखी थीं निकहत
भारतीय मुक्केबाज ने कहा, सवाल उठाने के बाद काफी बड़ा विवाद खड़ा हो गया था तो मुझे बहुत बुरा लगा था। मैंने कभी सोचा नहीं था कि मैं अपने रोल मॉडल के साथ विवाद में रहूंगी। उनके लिए मेरे दिल में हमेशा से इज्जत थी, लेकिन जब वो जो हादसा हुआ तो मेरा दिल टूट गया था कि मेरा ओलंपिक पदक जीतने के सपना पूरा नहीं होगा, लेकिन फिर जब ट्रायल हुए मैं हारी, फिर लॉकडाउन लग गया।
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निकहत ने कहा, उसके बाद फिर मुझे लगा कि मेरा कभी नंबर नहीं लगेगा इस वर्ग में क्योंकि मेरे से सीनियर मुक्केबाज हैं और कोई युवा प्रतिभा पर ध्यान नहीं दे रहा है, लेकिन मैंने उम्मीद नहीं खोई और कोशिश करती रही। 2022 में जब विश्व चैंपियनशिप खेलने का मौका मिला, मैंने ट्रायल खेला, उसमें जीती और इस्तांबुल जाने का मौका मिला। वहां मैंने विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। भारत से मैं अकेले फाइनल में थी और मैंने स्वर्ण पदक जीता। 14 साल बाद भारत के बाहर मुक्केबाजी विश्व चैंपियनशिप में किसी मुक्केबाज ने स्वर्ण पदक जीता था। मुझे बहुत खुशी हुई। तब मैंने एक चीज सीखी कि मेहनत करना कभी नहीं छोड़ना चाहिए। लगे रहो, ऊपर वाला जरूर आपको कामयाबी देगा।
'मेहनत करने पर सफलता जरूर मिलेगी'
दो बार विश्व चैंपियनशिप में पदक जीत चुकीं निकहत ने कहा, जितने साल मैंने मुक्केबाजी की है, मैंने बस एक ही बात सीखी है कि अगर आप मेहनत करोगे तो सफलता आपको जरूर मिलेगी। किसी को जल्दी मिलती है तो किसी को इसके लिए थोड़ा संघर्ष करना पड़ता है। लेकिन ऊपर वाला जरूर सबको सफलता देता है, अगर आप मेहनत करोगे तो। जब मैंने मुक्केबाजी शुरू की थी तो उस वक्त इस बारे में इतनी जानकारी नहीं थी। तब विजेंदर सिंह ने 2008 बीजिंग ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था और मैरीकॉम ने 2012 लंदन ओलंपिक में कांस्य जीता था। मैं अखबर में इनकी खबरें पढ़ती थी और खुद को इमैजिन करती थी कि मुझे इनके जैसे बनना है। ये हमारे रोल मॉडल्स हैं। जब मैंने जूनियर वर्ग में पदक जीतने शुरू किए, युवा वर्ग में पदक जीतने शुरू किए तो हमेशा से एक सपना था कि मुझे भी ओलंपिक में पदक जीतना है और अपने रोल मॉडल्स की तरह बनना है।