फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Amar Ujala Samwad: 'मेरे दिल में हमेशा उनके लिए इज्जत थी', मैरीकॉम से विवाद पर निकहत का बड़ा खुलासा

Thu, 17 Apr 2025 05:37 PM IST
शोभित चतुर्वेदी स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ

सार

निकहत ने लखनऊ में जारी अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में शिरकत की। निकहत ने बताया कि किस तरह मैरीकॉम के साथ हुए विवाद से उन्हें दुख पहुंचा क्योंकि वह इस दिग्गज मुक्केबाज को अपना रोल मॉडल मानती हैं। 
विज्ञापन
निकहत जरीन - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारतीय महिला मुक्केबाज निकहत जरीन ने दिग्गज मुक्केबाज एमसी मैरीकॉम के साथ हुए उनके विवाद पर चुप्पी तोड़ी है। निकहत ने लखनऊ में जारी अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में शिरकत की। इस दौरान उनसे पूछा गया कि मैरीकॉम के वजन वर्ग में खेलकर उन्होंने किस तरह सफलता हासिल की? इस पर निकहत ने बताया कि उनके लिए यह कितना मुश्किल था। 
विज्ञापन

'हर खिलाड़ी का सपना होता है ओलिपंक पदक जीतना'
निकहत ने मैरीकॉम के साथ हुए विवाद पर कहा, जब मैं सीनियर में आई थी तो फ्लाइट वेट वर्ग में खेलती थी। हर एथलीट का सपना होता है कि ओलंपिक खेलना है और इसमें पदक जीतना है। देश के लिए तो यही सपना लेकर मैं सीनियर में आई। जिस भार वर्ग में मैं खेलती हूं उसमें पहले से ही तगड़ा मुकाबला था। इसमें लीजेंड मैरीकॉम थीं, जिनका इस भार वर्ग में दबदबा था। तो मुझे काफी संघर्ष करना पड़ा उस भार वर्ग में जगह बनाने के लिए। मुझे जब लगा कि मैं अपने प्राइम टाइम में हूं और ये पता चला कि ओलंपिक के लिए कोई ट्रायल नहीं हो रहा है और उन्हें ऐसे ही भेजा जा रहा है तो मैंने आवाज उठाई थी और इसके खिलाफ बोला था।

विवाद से दुखी थीं निकहत 
भारतीय मुक्केबाज ने कहा, सवाल उठाने के बाद काफी बड़ा विवाद खड़ा हो गया था तो मुझे बहुत बुरा लगा था। मैंने कभी सोचा नहीं था कि मैं अपने रोल मॉडल के साथ विवाद में रहूंगी। उनके लिए मेरे दिल में हमेशा से इज्जत थी, लेकिन जब वो जो हादसा हुआ तो मेरा दिल टूट गया था कि मेरा ओलंपिक पदक जीतने के सपना पूरा नहीं होगा, लेकिन फिर जब ट्रायल हुए मैं हारी, फिर लॉकडाउन लग गया।

ये भी पढ़ें: Amar Ujala Samwad: भविष्य के लिए कैसी है निकहत जरीन की तैयारी? पेरिस ओलंपिक के बाद से नहीं लड़ी एक भी बाउट

निकहत ने कहा, उसके बाद फिर मुझे लगा कि मेरा कभी नंबर नहीं लगेगा इस वर्ग में क्योंकि मेरे से सीनियर मुक्केबाज हैं और कोई युवा प्रतिभा पर ध्यान नहीं दे रहा है, लेकिन मैंने उम्मीद नहीं खोई और कोशिश करती रही। 2022 में जब विश्व चैंपियनशिप खेलने का मौका मिला, मैंने ट्रायल खेला, उसमें जीती और इस्तांबुल जाने का मौका मिला। वहां मैंने विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। भारत से मैं अकेले फाइनल में थी और मैंने स्वर्ण पदक जीता। 14 साल बाद भारत के बाहर मुक्केबाजी विश्व चैंपियनशिप में किसी मुक्केबाज ने स्वर्ण पदक जीता था। मुझे बहुत खुशी हुई। तब मैंने एक चीज सीखी कि मेहनत करना कभी नहीं छोड़ना चाहिए। लगे रहो, ऊपर वाला जरूर आपको कामयाबी देगा।
विज्ञापन

'मेहनत करने पर सफलता जरूर मिलेगी'
दो बार विश्व चैंपियनशिप में पदक जीत चुकीं निकहत ने कहा, जितने साल मैंने मुक्केबाजी की है, मैंने बस एक ही बात सीखी है कि अगर आप मेहनत करोगे तो सफलता आपको जरूर मिलेगी। किसी को जल्दी मिलती है तो किसी को इसके लिए थोड़ा संघर्ष करना पड़ता है। लेकिन ऊपर वाला जरूर सबको सफलता देता है, अगर आप मेहनत करोगे तो। जब मैंने मुक्केबाजी शुरू की थी तो उस वक्त इस बारे में इतनी जानकारी नहीं थी। तब विजेंदर सिंह ने 2008 बीजिंग ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था और मैरीकॉम ने 2012 लंदन ओलंपिक में कांस्य जीता था। मैं अखबर में इनकी खबरें पढ़ती थी और खुद को इमैजिन करती थी कि मुझे इनके जैसे बनना है। ये हमारे रोल मॉडल्स हैं। जब मैंने जूनियर वर्ग में पदक जीतने शुरू किए, युवा वर्ग में पदक जीतने शुरू किए तो हमेशा से एक सपना था कि मुझे भी ओलंपिक में पदक जीतना है और अपने रोल मॉडल्स की तरह बनना है।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें