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Amar Ujala Samwad: बचपन में क्यों तेज दौड़ा करती थीं निकहत जरीन? भारतीय मुक्केबाज ने सुनाया मजेदार किस्सा

Thu, 17 Apr 2025 05:21 PM IST
शोभित चतुर्वेदी स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ

सार

अमर उजाला संवाद कार्यक्रम के दौरान निकहत ने अपने करियर से जुड़े किस्सों को साझा किया और बताया कि किस तरह उन्होंने मुक्केबाजी में अपनी पहचान बनाई।
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निकहत जरीन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दो बार की विश्व चैंपियन भारतीय महिला मुक्केबाज निकहत जरीन गुरुवार को अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में पहुंचीं। यह दो दिवसीय कार्यक्रम उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित हो रहा है जिसमें कई बड़ी हस्तियां पहुंच रही हैं। इसी कड़ी में भारत के दो दिग्गज मुक्केबाज विजेंदर सिंह और निकहत जरीन भी इस कार्यक्रम में पहुंचे। इन दोनों मुक्केबाजों ने 'खिलाड़ियों की राह, आसान या मुश्किल' सत्र में लोगों को संबोधित किया। 
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निकहत ने 13 की उम्र में शुरू की बॉक्सिंग
28 साल की निकहत ने महज 13 साल की उम्र में बॉक्सिंग शुरू कर दी थी, लेकिन उनके लिए यह राह आसान नहीं थी। समाज की तरफ से उन पर हिजाब पहनने का दबाव डाला गया। उनके शॉर्ट्स पहनने पर भी आपत्ति जताई गई। हालांकि, निकहत के पास उनके परिवार का समर्थन था और वह इन सब चीजों से लड़ते हुए कड़ी प्रैक्टिस पर लगी रहीं। निकहत के पिता जमील अहमद खुद पूर्व फुटबॉलर और क्रिकेटर रह चुके हैं। ऐसे में उन्होंने बेटी को खेल में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। निकहत 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। वहीं, 2023 महिला विश्व बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। हालांकि, वह पिछले साल ओलंपिक में पदक जीतने में कामयाब नहीं हो पाई थीं।

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निकहत ने करियर से जुड़े किस्सों का साझा किया
अमर उजाला संवाद कार्यक्रम के दौरान निकहत ने अपने करियर से जुड़े किस्सों को साझा किया और बताया कि किस तरह उन्होंने मुक्केबाजी में अपनी पहचान बनाई। निकहत से इस दौरान पूछा गया कि बचपन में आप बहुत तेज दौड़ा करती थीं, तो इसके पीछे क्या कारण था? इसे लेकर निकहत ने पूरी कहनी सुनाई और बताया कि किस तरह उनकी दौड़ देखकर स्कूल में टीचर हैरान रह गए थे। 

निकहत ने कहा, मैं जब छठे क्लास में थी और मेरी दीदी 10वीं कक्षा में थी तो मेरा स्कूल दोपहर 3.45 पर खत्म हो जाता था, लेकिन 10वीं के लिए अतिरिक्त क्लेसस चलती थीं, तो उनका स्कूल साढ़े पांच बजे खत्म होता था। मेरे घर वाले ऑटो रिक्शा अफोर्ड नहीं कर पाते थे तो मुझे उनके लिए इंतजार करना पड़ता था। इस दौरान मैं अपनी एक दोस्त के साथ पीछे मैदान में दौड़ लगाती थी। दोस्त एथलेटिक्स का अभ्यास कर रही होती थी तो उसने मुझे एक बार रेस के लिए बुला लिया। 

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पीटी टीचर ने किया समर्थन
उन्होंने कहा, मैं रेस में सबसे आगे पहुंची और मेरे दोस्त काफी पीछे रह गए। तो वहां टीचर हैरान रह गए कि कल की आई लड़की ने मेरे एक साल से अभ्यास कर रहे छात्रों को पीछे छोड़ दिया। फिर उन्होंने मेरे पिता का नाम पूछा और भाग्यवश पीटी टीचर और मेरे पिता दोस्त निकले। फिर मेरे पीटी टीचर ने मेरा काफी समर्थन किया और कहा कि तुमने पहले कभी एथलेटिक्स में हिस्सा लिया है? तो मैंने कहा कि बचपन में मेरे पीछे कुत्ते भागते थे तो ऐसे भाग-भाग कर मेरी दौड़ अच्छी हुई है। अपनी जान बचाने के लिए मैंने इतना भागा कि मेरी एथलेटिक्स अच्छी हो गई।

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