अपने जीवन पर बनी फिल्म ‘भाग मिल्खा भाग’ की सफलता से गदगद गुजरे जमाने के जाने-माने एथलीट मिल्खा सिंह के तेवरों में बदलाव नहीं आया है।
भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के महानिदेशक जीजि थामसन के साथ गुरुवार को मंच सांझा करने के दौरान उन्होंने देश में खेलों की स्थिति को लेकर साई को कटघरे में खड़ा कर दिया।
1960 के रोम ओलंपिक में चौथा स्थान हासिल करने वाले मिल्खा ने कहा साई का जिस तरह का ढांचा है उससे विश्वस्तरीय एथलीट पैदा करना नामुमकिन है। उन्हें दुख है कि पिछले कुछ सालों में देश ने मिल्खा सिंह, पीटी ऊषा, श्रीराम सिंह व अंजू बॉबी जार्ज जैसा एक भी एथलीट पैदा नहीं किया है।
नेशनल स्कूल गेम्स की शुरुआत के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में मिल्खा ने अपनी फिल्म का भी जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि उन पर फिल्म बनने के बाद कार्ल लुइस जैसे एथलीट ने उन्हें फोन किया।
मिल्खा कहते हैं कि यह फिल्म बनना जरूरी थी। आखिर आज की पीढ़ी उनके बारे में कैसे जानेगी? यही नहीं उन्होंने यहां तक कहा कि खिलाड़ियों के जीवन पर भी फिल्में बननी चाहिए।
उन्होंने साई के प्रशिक्षकों पर सवालिया निशान लगाते हुए उनमें जज्बा नहीं होने की बात कही। उन्होंने कटाक्ष किया कि साई खिलाड़ियों से ज्यादा प्रशिक्षकों को पैदा कर रही है। इन हालातों में देश में खेल तरक्की नहीं कर सकता।
उन्होंने साई डीजी से कहा कि परिणाम देने वाले प्रशिक्षकों की तैनाती की जाए साथ ही उन्हें लक्ष्य देकर करार के तहत अनुबंधित किया जाए।
थामसन ने भी मिल्खा सिंह की बात का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यह सही है कि एक बार नौकरी मिलने के बाद प्रशिक्षक अपना असली काम भूल जाते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि इस वक्त साई में 1500 प्रशिक्षकों के पद हैं लेकिन 300 पद खाली पड़े हैं। अगले कुछ दिनों में दो सौ पदों को वह भरने जा रहे हैं।