बर्थडे पर मिला सबसे बड़ा तोहफा
लवलीना के लिए दो अक्तूबर की तारीख अब उनके करियर की सबसे खास तारीखों में शामिल हो गई है। जिस दिन वह 29 साल की हुईं, उसी दिन उन्होंने एशियाई खेलों का सबसे बड़ा मुकाम हासिल किया। असम की इस मुक्केबाज ने रिंग में उतरने से पहले ही एक उपलब्धि अपने नाम कर ली थी। वह लगातार दो एशियाई खेलों के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला मुक्केबाज बनी थीं। 2023 के बजाय 2022 में आयोजित हांगझोउ एशियाई खेलों में उन्होंने रजत पदक जीता था, जबकि इस बार उन्होंने उस पदक का रंग बदल दिया।
75 किलो में भारत का पहला एशियाड गोल्ड
लवलीना का स्वर्ण महिलाओं के 75 किग्रा भार वर्ग में भारत का पहला एशियाई खेल स्वर्ण है। इस भार वर्ग में भारत की महिला मुक्केबाजों ने इससे पहले भी पदक जीते हैं, लेकिन सोना नहीं आया था। 2010 ग्वांगझू एशियाई खेलों में कविता गोयत ने कांस्य पदक जीता था। 2014 इंचियोन में पूजा रानी ने कांस्य अपने नाम किया। 2022 हांगझोउ में लवलीना ने रजत पदक जीता। अब 2026 आइची-नागोया में लवलीना ने इसी भार वर्ग में भारत को पहली बार चैंपियन बनाया है।
| एशियन गेम्स |
भारतीय पदक विजेता |
पदक |
| 2010 ग्वांगझू |
कविता गोयत |
कांस्य |
| 2014 इंचियोन |
पूजा रानी |
कांस्य |
| 2022 हांगझोउ |
लवलीना बोरगोहेन |
रजत |
| 2026 आइची-नागोया |
लवलीना बोरगोहेन |
स्वर्ण |
कौन हैं लवलीना बोरगोहेन?
लवलीना बोरगोहेन असम के गोलाघाट जिले के बड़ामुखिया गांव की रहने वाली भारतीय मुक्केबाज हैं। उनका जन्म 2 अक्टूबर 1997 को हुआ था। उन्होंने अपनी जुड़वां बहनों को देखकर शुरुआत में किकबॉक्सिंग अपनाई थी, लेकिन 2012 में स्कूल में भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के ट्रायल के दौरान उनकी प्रतिभा पहचानी गई और उन्होंने मुक्केबाजी का रुख किया।
ओलंपिक पदक से विश्व चैंपियन बनने तक
लवलीना की पहचान सिर्फ एशियाई खेलों की चैंपियन के तौर पर नहीं है। वह पहले ही भारतीय बॉक्सिंग में बड़ा नाम बना चुकी हैं। लवलीना ने 2018 और 2019 विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीते। टोक्यो ओलंपिक 2020 में उन्होंने महिलाओं के 69 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक जीता था। इसके साथ ही वह ओलंपिक पदक जीतने वाली भारत की तीसरी मुक्केबाज और मैरी कॉम के बाद दूसरी भारतीय महिला मुक्केबाज बनी थीं। इसके बाद उन्होंने 75 किग्रा वर्ग में अपना सफर आगे बढ़ाया। 2023 विश्व चैंपियनशिप में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता। उसी वर्ष एशियाई खेलों में उन्होंने रजत पदक अपने नाम किया। 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में भी उनके खाते में रजत पदक आया।
लवलीना का शानदार सफर
| प्रतियोगिता |
वर्ष |
पदक/नतीजा |
भार वर्ग |
| ओलंपिक |
2020 |
कांस्य |
69 किग्रा |
| विश्व चैंपियनशिप |
2018 |
कांस्य |
69 किग्रा |
| विश्व चैंपियनशिप |
2019 |
कांस्य |
69 किग्रा |
| एशियाई चैंपियनशिप |
2021 |
कांस्य |
वेल्टरवेट |
| एशियाई चैंपियनशिप |
2022 |
स्वर्ण |
75 किग्रा |
| एशियाई खेल |
2022 |
रजत |
75 किग्रा |
| विश्व चैंपियनशिप |
2023 |
स्वर्ण |
75 किग्रा |
| कॉमनवेल्थ गेम्स |
2026 |
रजत |
75 किग्रा |
| एशियाई खेल |
2026 |
स्वर्ण |
75 किग्रा |
लवलीना को 2020 में अर्जुन पुरस्कार और 2021 में मेजर ध्यानचंद खेल रत्न से सम्मानित किया गया। 2022 में उन्हें असम पुलिस में डीएसपी नियुक्त किया गया था।
मैरी कॉम के बाद अब लवलीना
भारतीय महिला बॉक्सिंग के एशियाई खेलों के इतिहास में अब दो स्वर्ण पदक विजेता हैं। मैरी कॉम ने 2014 में 51 किग्रा वर्ग में भारत को पहला महिला बॉक्सिंग गोल्ड दिलाया था। 12 साल बाद लवलीना ने 75 किग्रा वर्ग में भारत के लिए दूसरा स्वर्ण जीत लिया। दोनों की कहानी अलग-अलग भार वर्ग और अलग-अलग दौर की है, लेकिन एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक के मामले में लवलीना अब मैरी कॉम के साथ उसी खास सूची में शामिल हो गई हैं।
भारत के खाते में 12वां स्वर्ण
लवलीना के स्वर्ण के साथ एशियाई खेलों में भारत के स्वर्ण पदकों की संख्या 12 हो गई। भारत के खाते में अब 12 स्वर्ण, 24 रजत और 34 कांस्य समेत कुल 70 पदक हैं। पदक तालिका में भारत सातवें स्थान पर है।
| खेल |
स्वर्ण |
रजत |
कांस्य |
कुल |
| आर्चरी |
4 |
1 |
1 |
6 |
| एथलेटिक्स |
1 |
9 |
14 |
24 |
| बैडमिंटन |
0 |
0 |
1 |
1 |
| बॉक्सिंग |
1 |
0 |
3 |
4 |
| क्रिकेट |
1 |
0 |
0 |
1 |
| कबड्डी |
2 |
0 |
0 |
2 |
| कुराश |
0 |
0 |
1 |
1 |
| मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स |
0 |
0 |
1 |
1 |
| रोइंग |
0 |
0 |
1 |
1 |
| सेलिंग |
0 |
1 |
2 |
3 |
| शूटिंग |
3 |
8 |
4 |
15 |
| सॉफ्ट टेनिस |
0 |
0 |
1 |
1 |
| स्क्वैश |
0 |
2 |
3 |
5 |
| टेबल टेनिस |
0 |
0 |
1 |
1 |
| वेटलिफ्टिंग |
0 |
1 |
0 |
1 |
| कुश्ती |
0 |
1 |
1 |
2 |
| वुशु |
0 |
1 |
0 |
1 |
| कुल |
12 |
24 |
34 |
70 |