लवलीना बोरगोहेन जब चीन की बाओ जियायी के खिलाफ मुकाबले के लिए उतरीं, तो वह अपने 29वें जन्मदिन पर खुद को एक ऐतिहासिक स्वर्ण पदक का तोहफा देना चाहती थीं। भारत की इस दिग्गज मुक्केबाज ने फाइनल में अपने प्रतिद्वंद्वी को 5-0 के सर्वसम्मति वाले स्कोर से करारी शिकस्त दी और मैरीकॉम के बाद एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला मुक्केबाज बन गईं।
लवलीना बोलीं- जीत का था भरोसा
मैच के बाद स्वर्ण पदक जीतने पर उन्होंने अपनी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्रतिक्रिया दी और इसे अपने जन्मदिन का तोहफा बताया। उन्होंने कहा, मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। मैंने सोचा था कि मुझे अपने जन्मदिन पर खुद को एक स्वर्ण पदक गिफ्ट करना है। हार के बारे में एक सेकेंड के लिए भी कोई विचार नहीं आया था। यह एक बहुत कड़ा मुकाबला था। लेकिन मैं हमेशा यही सोच रही थी कि मुझे जीतना ही है।
जीत के बाद लवलीना बोरगोहेन
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राष्ट्रमंडल खेल में जीता था रजत
भारतीय मुक्केबाज ने हाल ही में राष्ट्रमंडल खेल 2026 में रजत पदक जीता था, जहां फाइनल में हार के कारण स्वर्ण पदक उनके हाथों से फिसल गया था। हालांकि, लवलीना ने स्वीकार किया कि राष्ट्रमंडल खेल 2026 की सफलता भी उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण थी। उन्होंने कहा, ऐसा नहीं था कि राष्ट्रमंडल खेलों के बाद मैं निराश थी। मैं रजत पदक जीतकर भी बहुत खुश थी। एक खिलाड़ी के जीवन में कई चीजें होती हैं, हार और चोटें होती हैं जिन्हें हमें संभालना होता है और आगे बढ़ना होता है। यह स्वर्ण पदक मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण था।
पहले दौर में 3-2 से करीबी बढ़त बनाने के बाद लवलीना ने मुकाबले में अपना दबदबा कायम रखा। उन्होंने हांगझू खेलों में रजत पदक जीतने के बाद, एशियाई खेलों का अपना दूसरा पदक हासिल करने के लिए अगले दोनों दौर 4-1 के समान अंतर से जीते। 2026 के एशियाई खेलों के फाइनल में पहले दो दौर में आगे रहने के बाद वह अंतिम दौर में सतर्क थीं। उन्होंने कहा, हां, आखिरी दौर बहुत कठिन था। प्रतिद्वंद्वी बहुत मजबूत थी। मैं उनके साथ पहली बार खेल रही थी। इसलिए मुझे कोई अंदाजा नहीं था कि वह कैसे खेलने वाली हैं। मैं खुद को प्रेरित कर रही थी कि मुझे जीतना ही है। चाहे कुछ भी हो जाए, मैं हारना नहीं चाहती। आखिरी दौर भी कुछ ऐसा ही था। मैंने पहले दो दौर जीते और मैं सोच रही थी कि मुझे तीसरा दौर भी जीतना ही है।
उन्होंने कहा, मैं स्वर्ण पदक जीतने के लिए एशियाई खेलों में आई थी। मैंने खुद को प्रेरित किया कि मुझे मजबूत रहना है और मुझे जीतना है। मैं हर चीज को लेकर बहुत सकारात्मक थी। जापान मेरे लिए बहुत लकी है। मैं हर समय यही सोच रही थी। यह मेरा जन्मदिन था और मैंने मुकाबला जीत लिया। यह कठिन था, लेकिन मैंने दमदार तरीके से जीत हासिल की।
लवलीना बोरगोहेन
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लवलीना के लिए ऐतिहासिक है जीत
भारतीय महिला मुक्केबाजी में यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है क्योंकि 2014 के इंचियोन खेलों में जीत दर्ज करने वाली मैरीकॉम के साथ अब इस फेहरिस्त में लवलीना का नाम भी शामिल हो गया है। उन्होंने कहा कि इस बात को स्वीकार करने में उन्हें थोड़ा समय लगेगा। लवलीना ने कहा, मुझे अच्छा लग रहा है। मुझे नहीं पता कि अपने गोल्ड का जश्न कैसे मनाऊं। मुकाबला अभी-अभी समाप्त हुआ है। मैंने जो जीत हासिल की है, उसे स्वीकार करने में मुझे कुछ समय चाहिए। मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।