प्रदेश की फुटबॉल टीम के चयन के लिए जिलों में चयन ट्रायल तक नहीं लिए जाते। वहीं, कई खिलाड़ियों को बिना कैंप टीम में शामिल कर लिया गया। ऐसे में कई बेहतर फुटबॉलरों को राष्ट्रीय स्तर पर खेलने का मौका ही नहीं मिल पाता है।
खेल मंत्री और विभाग मौन
प्रदेश में राज्य खेल की दुर्दशा पर खेल मंत्री और खेल विभाग भी चुप्पी साधे हुए हैं। टीम चयन से लेकर खिलाड़ियों को भेजने तक में एसोसिएशन की मनमानी पर कई बार सवाल उठ चुके हैं, लेकिन कोई असर नहीं पड़ा। कुछ समय पूर्व खेल मंत्री अरविंद पांडेय ने फुटबॉल एसोसिएशन की स्थिति सुधारने और एक सप्ताह के भीतर दूसरी बैठक बुलाने का दावा किया था, हालांकि उनका यह दावा भी हवाई ही निकला। यही कारण है कि राज्य में फुटबॉल एसोसिएशन जमकर मनमानी कर रही है। इसका खामियाजा राज्य खेल और फुटबालरों को भुगतना पड़ रहा है।
जिन अच्छे खिलाड़ियों का चयन हुआ था, वह सभी मेडिकल में ओवरएज निकल गए। बाद में कैंप में शामिल 30 में से अन्य खिलाड़ियों को खेलने के लिए भेजना पड़ा। इससे टीम अच्छी नहीं बन पाई। यही कारण है कि टीम अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई।
- देवेंद्र राणा, संयुक्त सचिव, उत्तराखंड फुटबॉल एसोसिएशन