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एक हाथ गंवाने के बाद भी नहीं टूटा हौंसला, करते हैं शानदार बल्लेबाजी, लगाते हैं चौके और छक्के

Wed, 24 Oct 2018 02:34 PM IST
वाहिद अली, अमर उजाला, मेरठ
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मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
‘यूं तो कदम-कदम पर हैं दीवार सामने, कोई न हो तो खुद से उलझ जाना चाहिए’ ये चंद लाइन एक हाथ के बल्लेबाज प्रमोद कुमार के लिए सटीक बैठ रही है। मेरठ के रहने वाले प्रमोद ने सात साल की कम उम्र में एक हादसे में बायां हाथ गंवाने के बाद भी अपना हौसला नहीं गंवाया। 16 वर्षीय प्रमोद एक हाथ से ही शानदार बल्लेबाजी करते हैं।
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मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
प्रमोद कुमार मूल रूप से परीक्षितगढ़ के इकला खानपुर के रहने वाले हैं। पिता ओमप्रकाश मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण करते हैं। चार बहन-भाईयों में प्रमोद सबसे छोटा है। प्रमोद के पिता ओमप्रकाश ने बताया कि प्रमोद जब 7 साल का था तो ट्यूबवैल से हुए एक हादसे में उसने अपना बायां हाथ गंवा दिया था।
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मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया कि परिवार के लोग प्रमोद पर पढ़ाई को लेकर ज्यादा दबाव नहीं डालते थे। बचपन से ही गली मोहल्ले में क्रिकेट खेलने से प्रमोद के मन में क्रिकेट के प्रति लगाव हो गया और प्रमोद ने देश के लिए कुछ करने की ठानी। जिसके बाद प्रमोद ने दो साल पहले मेरठ में क्रिकेट अभ्यास करने का मन बनाया।

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मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
कैलाश प्रकाश स्टेडियम में कुछ दिन अभ्यास के बाद प्रमोद ने करन एकेडमी में अभ्यास शुरू किया। प्रमोद ने बताया अधिकतर एकेडमी दिव्यांग खिलाड़ियों को अभ्यास के लिये मना कर देती हैं, लेकिन कैलाश प्रकाश स्टेडियम और करन एकेडमी ने उसे मौका दिया। 
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लगाते हैं कवर और स्टेट ड्राइव

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मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
कोच अतहर अली ने बताया कि प्रमोद कुमार एक हाथ से शानदार कवर ड्राइव और स्टेट ड्राइव करते हैं। बल्ला पकड़ने का अंदाज ही प्रमोद को एक अच्छे बल्लेबाज होने का अनुभव दिलाता है।
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प्रमोद भारतीय क्रिकेटर रोहित कुमार को अपना आईडल मानते हैं और इंडिया की दिव्यांग टीम का हिस्सा बनना चाहते हैं। जिसके लिये वो प्रतिदिन करन क्रिकेट एकेडमी में जमकर अभ्यास करते हैं। प्रमोद ने बताया क्रिकेट खेलने को लेकर उनके परिवार के लोग पूरा सहयोग कर रहे हैं।
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उन्हें उम्मीद है कि एक दिन परिवार के साथ जिले का नाम भी रोशन करेंगे। क्रिकेट कोच अतहर अली ने बताया एकेडमी में तीन दिव्यांग खिलाड़ी अभ्यास करते हैं। जिनमें दो खिलाड़ियों का उप्र की दिव्यांग टीम में चयन हो गया है। ऐसे खिलाड़ियों की जो मदद होती है वो भी एकेडमी द्वारा की जाती है।  


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