टीम में शामिल होने के लिए फर्जीवाड़ा करने का खिलाड़ियों को नुकसान भी झेलना पड़ सकता है। नए नियमों के तहत दस्तावेजों में फर्जीवाडे़ और गड़बड़ियों पर बीसीसीआई संबंधित क्रिकेटर पर दो साल तक का बैन लगा सकती है। इस अवधि में वह क्रिकेटर संबंधित टीम और बीसीसीआई की किसी भी प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले सकता। साथ ही संबंधित क्रिकेटर को हमेशा शक की नजर से भी देखा जाता है।
कई स्कूल और एकेडमी शामिल
क्रिकेटरों के फर्जी दस्तावेज तैयार करने के खेल में कई स्कूल और क्रिकेट कोचिंग एकेडमी भी शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, अंडर-19 और अंडर-16 के ट्रायल से पहले ही हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के कई क्रिकेटरों के फर्जी दस्तावेज तैयार कर लिए गए थे। उन क्रिकेटरों के उत्तराखंड के स्कूलों में पढ़ाई करने और जन्म प्रमाण पत्र के फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए।
ट्रायल में शामिल लगभग 90 फीसदी क्रिकेटरों के दस्तावेज अगस्त माह में बनाए गए थे। खिलाड़ियों के अभिभावक शुरूआत में ही दस्तावेज तैयार कर लेते हैं। ऐसे में पहली बार आयोजित हो रहे ट्रायल से एक माह पहले जन्म व निवास के प्रमाण पत्र तैयार करना क्रिकेटर को संदेह के घेरे में लाता है। बीसीसीआई सभी दस्तावेजों की कई स्तरों पर जांच करवा रही है। इसके अलावा भी अगर किसी के दस्तावेजों को लेकर शिकायत आती है तो उसकी जांच के बाद कार्रवाई की जाती है। अंडर-19 टीम के तीन खिलाड़ियों पर दो साल का बैन इसी के तहत लगाया गया।
- प्रो. रत्नाकर शेट्टी, समन्वयक, उत्तराखंड क्रिकेट संचालन समिति
टीम से जुड़ी कोच
अंडर-19 बालिका टीम की नवनियुक्त कोच सविता निराला बृहस्पतिवार को टीम के साथ जुड़ गईं। बीसीसीआई ने पहले राज्य की अंडर-19 बालिका टीम के लिए गौतम सोम को कोचिंग का जिम्मा सौंपा था। हालांकि शिविर के पहले तीन दिन वह नहीं पहुंचे। पारिवारिक कारणों से हटने के बाद बीसीसीआई ने सविता को जिम्मेदारी सौंपी। सविता बृहस्पतिवार को तनुष क्रिकेट एकेडमी में चल रहे कैंप में पहुंची, जिसके बाद चौथे दिन महिला क्रिकेटरों ने पहली बार अभ्यास किया। उन्होंने बैटिंग, फिल्डिंग, बॉलिंग, रनिंग का भी अभ्यास किया।