नोएडा और ग्रेटर नोएडा में अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम हैं। इसके अलावा जेपी स्टेडियम, सर्फाबाद में मिनी स्टेडियम, मलकपुर, जीबीयू समेत कई स्टेडियम होने के बावजूद अच्छी प्रतिभाएं नहीं निकल पा रही हैं। इसके लिए निजी एकेडमी को पैसों के अलावा खेलों को बढ़ावा देने के लिए गरीब बच्चों को स्कॉलरशिप देनी पड़ेगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट खेल चुके परविंदर अवाना ने यह बातें कहीं।
परविंदर का कहना है कि जिला गौतमबुद्धनगर में अंतरराष्ट्रीय स्तर के मुकाबले होने के बावजूद गौतमबुद्ध जिला क्रिकेट एसोसिएशन तक नहीं बनी है। यहां के बच्चों को ट्रायल के लिए गाजियाबाद जाना पड़ता है। होना तो यह चाहिए कि जिले में ही क्रिकेट एसोसिएशन को मान्यता मिले और यहीं से ट्रायल देकर बच्चे पहले मेरठ जाएं और आगे चलकर कानपुर में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाएं। परविंदर बताते हैं कि जिला क्रिकेट एसोसिएशन न होने के चलते उन्हें स्वयं दिल्ली में जाकर क्लबों में खेलना पड़ा। इसके बाद उनका दिल्ली रणजी के चयन हुआ।
वहीं, कुश्ती में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक दिलाकर जिले का नाम रोशन करने वाली महिला पहलवान बबीता नागर का कहना है कि हरियाणा की तरह यहां के भी युवाओं में खेल के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जाना चाहिए। जागरूकता के बिना युवा कुछ माह तो मेहनत करते हैं लेकिन सही मार्गदर्शन के बिना आगे नहीं बढ़ पाते। शासन की ओर से जिला स्तर पर ऐसी सुविधाएं मिलनी चाहिए, जिससे युवा खेल की ओर आकर्षित हों।