देश भर में चले पाश्चातय संस्कृति के बोल-बाले के बीच हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के तहत महाविद्यालयों में पढ़ाई कर रहे युवाओं ने लोक संस्कृति को सबसे उपर रखा है। इसी का नतीजा है कि राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला में युवा महोत्सव भाग-2 में लोक संस्कृति सब पर भारी पड़ रही है।
वहीं दूसरे स्थान पर भारतीय संस्कृति, जबकि पाश्चातय संस्कृति बुरी तरह से पिछड़ी है। शुक्रवार को एकल लोक गायन के हुए मकाबलों में महाविद्यालयों के प्रतिभागियों की संख्या ने सबको चौका दिया।
एकल लोक गायन में सर्वाधिक 41 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जबकि भारतीय समूह गान में 29, सुगम संगीत एवं गीत गजल में 36 प्रतिभागियों ने भाग लिया। वहीं शास्त्रीय गायन में 13 प्रतिभागी शामिल रहे।
इसके विपरित पाश्चातय समूहगान में 13 और एकल गायन में भी एक दर्जन के करीब महाविद्यालयों ने ही भाग लिया है। उधर, युवा महोत्सव भाग-2 के आयोजक सह सचिव डॉ हेमंत शर्मा ने बताया कि प्रदेश के युवाओं ने हिमाचली संस्कृति को सर्वोपरी रखते हुए सबसे अधिक प्रतिभागिता दिखाई है।
यह आंकड़ा लोक संस्कृति के प्रति युवाओं के रूझान को दिखा रहा है। देश भर में जहां पाश्चातय संस्कृति की ओर युवाओं का रूझान बड़ रहा है। वहीं प्रदेश के युवाओं की हिमाचली संस्कृति के संरक्षण में यह अच्छे संकेत हैं।