शशि का टीम में चयन हो गया। ग्रामीण परिवेश में पली बढ़ी एक लड़की के लिए घर की चौखट लांघना आसान काम नहीं था। उसने किसी तरह से परिवार को राजी किया, लेकिन इस सब के लिए 23 हजार खर्च आना था।
इसे खिलाड़ी को खुद वहन करना था। शशि ठाकुर कहती हैं इस दौरान सरकार से भी कोई वित्तीय मदद नहीं मिल पाई। जीवन के इस संघर्ष के दौर में रिश्तेदारों और दोस्तों से पैसे एकत्रित किए।
उधर, एसडीएम करसोग का कहना है कि उनके पास इस तरह की जानकारी नहीं है। अगर कोई इस तरह की मदद के लिए अप्रोच करता तो उसकी बात सरकार तक जरूर पहुंचाते।
शशि का स्पोर्ट्स से लगाव बचपन से ही रहा। उनका उद्देश्य भारत के लिए खेलना था। वह स्कूल में सामान्य खेलकूद प्रतियोगिताओं को देखती और घर में ही अभ्यास करतीं।
मुश्किल से स्थानीय और प्रदेश स्तर के विशेष टूर्नामेंट में वह हिस्सा लेने लगीं। इसी दौरान शशि ठाकुर की मुलाकात नेशनल कबड्डी टीम के वाइस प्रेजिडेंट रणजीत गोयल से हुई। उन्होंने मेहनत और लगन को देखकर शशि का नाम भारतीय टीम के लिए प्रस्तावित किया।