‘मंजिलें भी जिद्दी हैं, रास्ते भी जिद्दी हैं। पर क्या करूं मैं, हौसले भी तो मेरे जिद्दी हैं...’ हॉकी लीजेंड बलबीर सिंह सीनियर द्वारा अपने 95 वें जन्मदिवस पर लिखी गई यह पंक्ति उन पर सही चरितार्थ होती है। उनके बुलंद हौसले के आगे बीमारी टिक नहीं पाई। शुक्रवार को 108 दिन बाद उनको पीजीआई से छुट्टी मिल गई है।