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आधे शरीर में पैरालिसिस, मिट्टी के बर्तन बेचकर करता है गुजारा, मगर देश के लिए स्वर्ण जीतने का सपना

Thu, 11 Oct 2018 03:05 PM IST
विपुल सैनी, अमर उजाला, मेरठ
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रवि कुमार का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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उसके आधे शरीर में पैरालिसिस है, आर्थिक स्थिति भी बहुत कमजोर है। हालात यह है कि वह मिट्टी के बर्तन बेचकर अपना गुजारा करते हैं, लेकिन इसके बावजूद इस खिलाड़ी ने कभी हिम्मत नहीं हारी और देश के लिए ओलंपिक में पदक जीतने का सपना देखा। इस सपने को पूरा करने के लिए इस खिलाड़ी ने मन में दृढ़ निश्चय लिया और ठान लिया है कि अपने सपने को हर हाल में पूरा करना है। यह खिलाड़ी स्टेट और नेशनल लेवल पर कई पदक भी जीत चुका है...

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हम बात कर रहे हैं गंगानगर के सलारपुर निवासी 22 वर्षीय एथलीट रवि कुमार की। रवि अब तक स्टेट और नेशनल लेवल पर कई पदक जीत चुके हैं। 
 
जन्म से ही रवि के दाहिने ओर का आधा शरीर लकवाग्रस्त है। रवि ने बताया कि घर में मिट्टी के बर्तन बनाने का काम होता था। दस वर्ष की उम्र में ही रवि ने मिट्टी के बर्तन बनाने सीख लिए और मिट्टी के बर्तन बेचकर ही पढ़ाई का खर्चा चलाया। 10वीं और 12वीं में विज्ञान के छात्र रहे और बीसीए पास की। रवि ने बताया कि बचपन से ही एथलेटिक्स में रूचि थी, लेकिन दिव्यांगता और कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण यह आसान नहीं था। इसके बावजूद 2015 में उन्होंने अपनी कमजोरी को अपनी ताकत बनाकर विक्टोरिया पार्क में एथलेटिक्स की ट्रेनिंग लेनी शुरू कर दी। 

यह जुनून ही रहा कि रवि परिवार के लिए दिन में मिट्टी के बर्तन बनाकर बेचते और शाम को एथलेटिक्स की ट्रेनिंग पर जाते हैं। रवि के मुताबिक उनके पिता रनवीर सिंह, मां श्यामो देवी और उनके भाई-बहन ने हमेशा उनका साथ दिया। सबसे अधिक मदद उनके कोच गौरव त्यागी ने की। रवि ने 2018 में लखनऊ में राज्य स्तर प्रतियोगिता में 100 मी. दौड़ महज12.5 सेकेंड में पूरी की। रवि के मुताबिक एथलेटिक्स के लिए डाइट और प्रतियोगिताओं में शामिल होने का खर्च काफी बैठता है। जो मिट्टी के बर्तन बेचकर पूरा नहीं हो पाता। उनका सपना है कि 2020 में टोकियो में होने वाले ओलंपिक गेम्स में प्रतिभाग करूं और देश के लिए पदक जीतूं।

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रवि की उपलब्धियां
- 2015 में पैरा नेशनल एथलेटिक्स प्रतियोगिता गाजियाबाद में 100, 200, 400मी. रेस में प्रतिभाग। 
- 2016 में पैरा एथलेटिक्स प्रतियोगिता पंचकुला में 200मी. में कांस्य पदक
- 2017 में जयपुर में नेशनल प्रतियोगिता में 400 मी. में रजत 
- 2018 में स्टेट चैंपियनशिप लखनऊ में 200, 400 800मी. में स्वर्ण पदक जीता
- 2018 में पंचकुला में में रजत पदक जीता

त्योहार शुरू, अब प्रेक्टिस छोड़ मूर्ति, बर्तन बेचेंगे रवि 
रवि अपनी आर्थिक स्थिति में बाधा नहीं लाना चाहते। जिसके लिए अब त्योहारों के सीजन नवरात्रि, दशहरा, दीवाली आदि पर एथलेटिक्स की प्रेटिक्स छोड़कर मिट्टी के बर्तन, मूर्तियां, सजावट का सामान बेचेंगे। जिससे खेल के लिए पैसा जुड़े और उसके बाद वह अच्छे से अच्छी सुविधाएं जुटा सकें।

...तो सपना हो पूरा
रवि ने बताया कि स्वयं से जुटाए पैसे व कोच गौरव त्यागी द्वारा की गई आर्थिक मदद से वह प्रतियोगिताओं में भाग लेते हैं, लेकिन यदि सरकार और निजी संस्थाएं भी मदद कर दें तो सही सुविधाओं से वह और अच्छी प्रेक्टिस कर सकते हैं और उनका टोकियो ओलंपिक का सपना पूरा हो सकता है।

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