पहले महिलाओं के सिंगल्स फाइनल में और उसके बाद पुरुषों के फाइनल में जिस तरह की स्तरीय बैडमिंटन खेली गई दर्शक दीर्घा में बैठे भारतीय टीम के चीफ कोच गोपीचंद जरूर अपने शटलरों के भविष्य के बारे में सोच रहे होंगे।
वाकई में वर्ल्ड नंबर मलेशियाई ली चांग वेई ने रविवार को दिल्ली के सीरी फोर्ट कांप्लेक्स में दिखा दिया कि वह बैडमिंटन की दुनिया पर यू हीं राज नहीं कर रहे हैं।
दूसरी सीड चीनी चेन लांग को उन्होंने आसानी से सीधे गेमों में हराकर इंडिया ओपन सुपर सीरीज का खिताब एक बार फिर अपने नाम कर लिया।
वहीं महिलाओं के सिंगल्स में दूसरी सीड वांग शिजियान ने एक बार फिर वर्ल्ड नंबर अपनी ही साथी ली जू रुई को सीधे गेमों में परास्त कर खिताब जीता।
ली चांग की प्रतिद्वंद्विता चीनी दिग्गज लिन दान से मानी जाती है। लेकिन चेन लांग भी उनके लिए बुरा सपना बनते जा रहे थे।
इससे पहले दोनों के बीच जीत हार का रिकार्ड आठ-आठ की बराबरी पर था। लेकिन यहां ली ने जिस तरह का खेल दिखाया उसका चेन के पास कोई जवाब नहीं था। ली ने 55 मिनट में यह मुकाबला 21-13, 21-17 से जीत लिया।
वांग शिजियान के लिए इस साल की शुरूआत किसी परी कथा की तरह रही है। यह वही वांग हैं जो लंदन ओलंपिक के लिए अपने देश की टीम में जगह नहीं बना पाई थीं।
लेकिन पहले उन्होंने इस साल ऑल इंग्लैंड का फाइनल जीता और आज भी वह विजेता बनीं। ऑल इंग्लैंड की ही तरह उन्होंने फाइनल में ली जू रुई को पराजित किया।
यह मुकाबला बेहद संघर्षपूर्ण रहा। हालांकि इस टूर्नामेंट में यह पहली बार था जब शिजियान को कोई गेम नहीं हारना पड़ा। बावजूद इसके उन्हें 47 मिनट में 22-20, 21-19 से जीत हासिल हुई।
इससे पहले मिश्रित युगल का खिताब डेनमार्क की तीसरी सीड जोड़ी जोएकिम फिशर नीलसन और क्रिस्टीना पेडेरसन ने कोरिया के सुंग ह्यून को और हा ना किम को 21-16, 18-21,21-18 से हराकर जीता।
पुरुषों का युगल खिताब भी डेनमार्क की दूसरी सीड जोड़ी मथायस बोए और कार्सटन मोगेनसेन के पक्ष में गया। उन्होंने चीन के लियू जिलाओलांग और क्यू झियान को 17-21, 21-15, 21-15 से हराया।
जबकि महिलाओं का युगल खिताब तांग युआनतिंग और यू यांग ने जीता। उन्होंने कोरियाई क्यूंग युन जुंग और हा ना किम को 21-10, 13-21, 21-16 से पराजित किया।