जून में राष्ट्रमंडल खेलों के चयन ट्रायल के दौरान 48 किग्रा वर्ग के मुकाबले के शुरुआती मिनटों में ही इस अनुभवी मुक्केबाज का घुटना मुड़ने के कारण चोटिल हो गया था। इसके बाद उन्होंने मुंबई के एक अस्पताल में सर्जरी कराई थी। इसकी तस्वीर भी सामने आई थी। चोट के कारण 39 साल की मैरी कॉम राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा नहीं ले पाईं थी जहां वह 2018 में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला मुक्केबाज बनी थीं। मैरी कॉम ने पिछला टूर्नामेंट सोफिया बुल्गारिया में हुए स्ट्रेडजा कप में खेला था।
इसके अलावा वह पिछले साल टोक्यो ओलंपिक में भी खेली थीं, लेकिन प्री क्वार्टर फाइनल में हार गईं थी। मैरी कॉम को पद्म विभूषण से भी नवाजा जा चुका है। इसके अलावा वह ओलंपिक का कांस्य पदक जीत चुकी हैं। मैरी कॉम ओलंपिक मेडल जीतने वाली पहली और इकलौती भारतीय महिला बॉक्सर हैं। उनके पास एशियन और कॉमनवेल्थ गोल्ड भी है। मैरी कॉम ने ज्यादातर मेडल उन्होंने मां बनने के बाद जीते हैं।
मैरी कॉम के नाम आठ विश्व चैम्पियनशिप मेडल
मैरी कॉम ने अपना अंतरराष्ट्रीय सफर 2001 में शुरू किया था। शुरुआत में वो अपनी शारीरिक ताक़त और सहन-शक्ति पर निर्भर रहती थीं, लेकिन आज वो अपनी स्किल्स पर ज्यादा भरोसा करती हैं। वह अकेली महिला हैं जो रिकॉर्ड छह बार वर्ल्ड एमेच्योर बॉक्सिंग चैंपियन रही हैं। इसके अलावा वो अकेली बॉक्सर हैं जिन्होंने पहली सात विश्व चैम्पियनशिप में हर बार एक मेडल जीता है और अकेली बॉक्सर हैं (महिला या पुरुष) जिन्होंने आठ विश्व चैम्पियनशिप मेडल जीते हैं।
मैरी कॉम एआईबीए विश्व महिला की रैंकिंग लाइट फ्लाइवेट कैटेगरी में पहले पायदान पर रह चुकी हैं। वह दक्षिण कोरिया में 2014 में हुए एशियन खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला मुक्केबाज बनीं। इसके अलावा 2018 के कॉमनवेल्थ खेलों में भी स्वर्ण पदक जीतने वाली वो पहली महिला मुक्केबाज रहीं। मैरी कॉम ने 2002, 2005, 2006, 2008, 2010, 2018 में विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। इसके अलावा 2001 में रजत और 2019 में कांस्य पदक अपने नाम किया।