इंचियोन एशियाई खेलों का आठवां दिन पदक के लिहाज से भारत का सबसे बेहतर दिन साबित हुआ। पुरुष तीरंदाजी टीम ने भारत को कंपाउंड स्पर्धा में स्वर्ण पदक दिलाया जो गेम्स में देश का दूसरा स्वर्ण पदक है। जबकि व्यक्तिगत मुकाबलों में तीरंदाज अभिषेक वर्मा फाइनल में पहुंच गए हैं, वह देश को एक और स्वर्ण दिला सकते हैं।
दूसरी ओर, स्क्वैश में भारत के पास आज 2 स्वर्ण पदकों की आस थी लेकिन महिला टीम फाइनल में मलेशिया से हार गई और उसे रजत पदक से संतोष करना पड़ेगा। लेकिन पुरुष टीम ने अपने विजय अभियान को जारी रखते हुए देश को खेलों का तीसरा और दिन का दूसरा स्वर्ण पदक दिला दिया।
मुक्केबाजी और कुश्ती में भारत की शुरुआत मिली-जुली रही है। ओलंपिक मेडलिस्ट एमसी मैरीकॉम ने जीत से शुरुआत की है। जबकि शूटिंग में भारत को आज भी एक कांस्य पदक मिला है। कुश्ती में भारत की विनेश सेमीफाइनल में हार गईं।
तीरंदाजी में पहली बार गोल्ड, अभिषेक डबल गोल्ड से चूके
इंचियोन एशियाड में भारत को स्वर्ण पदक के लिए खासा संघर्ष करना पड़ रहा है। गेम्स के पहले दिन ही निशानेबाज जीतू राय ने देश को पहला गोल्ड दिलाया था लेकिन उसके बाद भारत को दूसरे गोल्ड के आठ दिन का इंतजार करना पड़ा।
शीर्ष तीरंदाज दीपिका कुमारी की नाकामी को पीछे छोड़ते हुए पुरुषों की भारतीय तीरंदाजी टीम ने इतिहास रचते हुए कंपाउंड स्पर्धा में गोल्ड जीत लिया है। भारत ने पहली बार तीरंदाजी में एशियाड में गोल्ड जीता है। रजत चौहान, संदीप कुमार और अभिषेक वर्मा की टीम ने फाइनल में मजबूत टीम कोरिया को हराकर गोल्ड मेडल जीता। भारत के पास तीरंदाजी में एक और स्वर्ण पदक जीतने का मौका था लेकिन अभिषेक वर्मा कंपाउंड तीरंदाजी में पुरुषों की व्यक्तिगत स्पर्धा में रजत पदक ही जीत पाए। वह बेहद कांटेदार मुकाबले में इरान के तीरंदाज इब्दी से 56-57 से हार गए।
तीरंदाजी में भारत की तृषा देब ने कंपाउंड तीरंदाजी में महिलाओं की व्यक्तिगत स्पर्धा में कांस्य पदक जीत लिया है। देब ने कांस्य के लिए हुए मुकाबले में चीनी ताइपे की हुआंग जो को 138-134 से हराया। इससे पहले इसी स्पर्धा में तृषा देब, पुर्वाषा शिंदे और ज्योति सुरेखा की भारतीय महिला टीम ने टीम ने कांस्य पदक के लिए हुए मुकाबले में इरान को 224-217 से हराया।
स्क्वैश में महिला टीम चूकी, पुरुष टीम ने जीता सोना
स्क्वैश में भारत के पास आज खेल के आठवें दिन स्वर्णिम सफलता हासिल करने का दोहरा मौका था। लेकिन भारत की महिला टीम फाइनल में मलेशिया से 0-2 से हार गई, इसके बाद पुरुष टीम ने स्वर्णिम प्रदर्शन करते हुए देश को खेलों का तीसरा सोना दिला दिया।
लगभग एक घंटे से कम समय में चले मुकाबले में दीपका और अंका अलंकामोनी अपने-अपने मुकाबले हार गई हैं। एकल मुकाबले में कांस्य पदक जीतने वाली दीपिका पल्लीकल के पास इस टीम स्पर्धा से स्वर्ण जीतने का मौका था लेकिन वह वर्ल्ड नंबर वन निकोल डेविड से महज 29 मिनट में हार गई। दीपिका ने यह मुकाबला 7-11, 6-11, 3-11 से गंवा दिया। दीपिका एकल के सेमीफाइनल में भी निकोल से हार गई थी। इससे पहले अंका अपना मुकाबला ओडेटे अर्नाल्ड डैलिया से 43 मिनट में 9-11, 10-120 2-11 से गंवा दिया। लगातार 2 मुकाबले हार जाने के कारण रबर मुकाबले की जरूरत ही नहीं पड़ी।
एशियाड में स्क्वैश में भारत का यह ऐतिहासिक प्रदर्शन रहा। भारत इस खेल से 1 स्वर्ण, 2 रजत और एक कांस्य पदक जीते हैं।
शूटिंग में चैन सिंह ने दिलाया कांस्य पदक
निशानेबाजी ने आज भी भारत को निराश किया लेकिन चैन सिंह ने 50 मीटर राइफल 3 पोजिशन में कांस्य पदक जीतकर देश को एक और पदक दिला दिया। हालांकि इस मुकाबले की टीम स्पर्धा में भारत को स्वर्ण पदक की आस थी लेकिन भारतीय शूटर पदक पर निशाना लगाने में कामयाब नहीं हुए।
ओलंपिक मेडलिस्ट गगन नारंग के अलावा चैन सिंह और संजीव राजपूत की भारतीय टीम 50 मीटर राइफल 3 पोजिशन में पदक से चूक गई। यह जोड़ी चौथे स्थान पर रही। लेकिन व्यक्तिगत मुकाबले में चैन सिंह 305.1 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहे और उन्हें कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा।
दूसरी ओर, नौकायन में भारतीय महिलाओं ने पदक की उम्मीद बरकरार रखी है। 29ईआर क्लास स्पर्धा के सातवें राउंड में डिस्क्वालीफाइड होने के बावजूद आठ राउंड के बाद वर्षा गौतम और ऐश्वर्या नेदूनचेझियान पदक की होड़ में बनी हुई हैं। अभी चार राउंड होने बाकी हैं और दोनों तीसरे स्थान पर बनी हुई हैं। टॉप तीन टीमों के बीच अंकों में अंतर भी बहुत कम है जिससे पदक की संभावना मजबूत है।
हॉकी में महिलाओं के बाद पुरुष टीम अंतिम चार में
भारतीय हॉकी टीम ने चीन को 2-0 से हराकर एशियन गेम्स के पुरुष मुकाबलों के सेमीफाइनल में जगह बना ली है। भारत के लिए ड्रैग फिल्क विशेषज्ञ वीआर रघुनाथ ने 40वें जबकि बिरेद्र लाकरा ने 45वें मिनट में गोल ठोका।
रघुनाथ का खराब फॉर्म इस मैच में भी जारी रहा और वह 5 में से सिर्फ एक पेनाल्टी कॉर्नर को गोल में तब्दील कर सके। सेमीफाइनल में भारत का मुकाबला मेजबान दक्षिण कोरिया से होगा जबकि एक अन्य सेमीफाइनल में पाकिस्तान और मलेशिया की भिड़ंत होगी।
टेबल टेनिस में भारतीय महिला और पुरुष टीमों ने अपना शानदार प्रदर्शन करते हुए दूसरे राउंड में जगह बनाई। भारतीय पुरुष टीम में शामिल सौम्याजीत घोष, अचंता शरथ कमल और अमलराज एंथोनी की तिकड़ी ने ग्रुप-बी के मुकाबले में वेस्ट एशियन नेशन को 3-0 से करारी शिकस्त दी। वहीं महिला टीम में शामिल मनिका बत्रा, मधुरिका सुहास और अनिता दास ने भी ग्रुप-ए डिवीजन-4 मैच में शानदार आगाज किया और नेपाल का 3-0 से सफाया किया।
ब्रेस्ट स्ट्रोक में पदक जीत इतिहास पुरुष बने संदीप
तैराकी यह वह विधा है जो न अब तक किसी भारतीय को भाई है और न ही देश के किसी तैराक ने आज तक ब्रेस्ट स्ट्रोक में कोई उपलब्धि दर्ज की। दिल्ली के संदीप सेजवाल ने जब 50 मीटर ब्रेस्ट स्ट्रोक के फाइनल में जगह बनाई तो इंचियोन पहुंचे भारतीय मीडिया कर्मियों में कुछ हैरानी हुई।
बावजूद इसके यह किसी ने नहीं सोचा था कि संदीप मुनहाक पार्क ती हान एक्वेटिक सेंटर में इतिहास रचने जा रहे हैं। यह दुर्भाग्य था कि संदीप 40 मीटर तक बढ़त बनाने के बावजूद रजत या स्वर्ण नहीं जीत सके। फिर यहां उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ 27.83 सेकंड का समय भी निकाला। 28.62 सेकंड के साथ उनके हिस्से में कांस्य आया, लेकिन संदीप और उनके कोच निहार अमीन के लिए यह किसी गोल्ड से कम नहीं था।
संदीप के पहले शब्द यही थे। अगर आज पदक नहीं जीता तो आठ साल के करियर का कोई फायदा नहीं। इन्हीं शब्दों से उन्होंने अपने आपको प्रोत्साहित किया। इससे पहले किसी भारतीय ने एशियाई खेलों में ब्रेस्ट स्ट्रोक में पदक नहीं जीता था।
शिवा, कुलदीप बढ़े, अखिल बाहर
गेम्स के सातवें दिन 56 किलोग्राम वर्ग में मुक्केबाज शिवा थापा और 81 किलोग्राम वर्ग में कुलदीप सिंह क्वार्टर फाइनल में पहुंचने में सफल रहे लेकिन लंबे समय बाद वापसी कर रहे अखिल कुमार को बाहर का रास्ता देखना पड़ा।
शिवा को पहले राउंड में वाकओवर मिला था। दूसरा राउंड भी औपचारिकता मात्र रहा जहां महज एक मिनट में पाकिस्तान के मुक्केबाज नादिर के दाईं आंख के ऊपर कट आ जाने के बाद रेफरी ने तकनीकी रूप से शिवा को विजेता घोषित कर दिया।
इसके बाद दिन के दूसरे मुकाबले में कुलदीप के सामने थाईलैंड के थोंगक्राथोक अनावत थे लेकिन भारतीय मुक्केबाज ने करीबी मुकाबले में 2-1 से जीत हासिल की। शुरुआती दो राउंड में 2-0 की बढ़त मिल जाने के बाद कुलदीप ने तीसरे राउंड में सुरक्षात्मक रुख अख्तियार किया और अगले राउंड में जगह पक्की की।
भारतीय समर्थकों की निगाहें सबसे अधिक तीसरे मुकाबले पर थी लेकिन यहां निराशा मिली और चोट के कारण तीन साल बाद वापसी कर रहे अखिल कुमार को फिलिपीनो चार्ली सुआरेज के हाथों 2-1 से हार का सामना करना पड़ा।