स्क्वैश में भारत की सबसे सफल महिला खिलाड़ी दीपिका पल्लीकल का एशियाई खेलों में एकल मुकाबलों में स्वर्ण पदक दिलाने का सपना टूट गया, लेकिन पुरुष वर्ग के एकल में सौरव घोषाल ने फाइनल में पहुंचकर पीले तमगे की उम्मीद जगा दी है।
दूसरी ओर, फुटबॉल, तैराकी और जूडो में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद वुशू में भारत को एक पदक मिलना तय हो गया है। जबकि जिम्नास्टिक आर्टिस्टक में दीपा करमारकर ने भी पदक की उम्मीद जगा दी है।
भारत को आज भी निशानेबाजी में पदक मिला है। यह पदक 25 मीटर रैपिड फायर पिस्टल टीम स्पर्धा में भारतीय टीम ने कांस्य पदक जीतकर दिलाया।
शूटिंग में महिला टीम ने जीता कांस्य
इंचियोन में निशानेबाजी में भारतीय निशानेबाजों का पदक जीतने का सिलसिला जारी है। 17वें एशियाई खेलों के तीसरे दिन भारतीय महिला टीम ने कांस्य पदक जीत लिया है।
महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल टीम स्पर्धा में भारत ने शानदार प्रदर्शन दिखाते हुए कोरियाई और चीनी निशानेबाजों को कड़ी टक्कर दी। हीना सिद्धू (572), अनीसा सईद (577) और राही सरनोबत (580) ने 1729 अंक हासिल कर भारत को पदक दिलाया। 1747 अंक लेकर चीन ने रजत और 1748 अंक हासिल कर कोरिया ने स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया।
हालांकि महिलाओं की 10 मीटर एयर रायफल टीम स्पर्धा में भारतीय टीम (अयोनिका पॉल, अपूर्वी चंदीला और राज चौधरी) ने निराशाजनक प्रदर्शन किया और छठे स्थान पर रही।
सौरव जगाई स्वर्ण पदक की आस
23 साल की दीपिका पल्लीकल भले ही भारत को एकल वर्ग में स्वर्ण पदक दिलाने का मौका चूक गई हों लेकिन पुरुष वर्ग में सौरव घोषाल ने पीले तमगे की उम्मीद जगा दी है।
सौरव ने सेमीफाइनल मुकाबले में 2002 और 2006 के एशियाड चैंपियन ओंग बेंग ही को हराकर फाइनल में जगह बनाई। वह फाइनल में पहुंचने वाले देश के पहले स्क्वैश खिलाड़ी हैं। शीर्ष वरीयता प्राप्त और 16वें नंबर के सौरव ने गजब का खेल दिखाया और 35वें नंबर के मलेशियाई खिलाड़ी को 45 मिनट में 11-9, 11-4, 11-5 से हराया।
इसके साथ ही भारत पहली बार स्क्वैश में कांस्य पदक के अलावा दूसरा पदक जीतेगा, यह तय हो गया है। इस एशियाड से पहले भारत ने 4 पदक जीते थे और सभी कांस्य पदक के रूप में थे। भारत अब तक इंचियोन में स्क्वैश से 2 पदक अपने नाम कर चुका है।
वुशू में भारत का एक पदक हुआ पक्का
रविवार को ही हमवतन जोशना चिनप्पा को हराकर सेमीफाइनल में पहुंचने के साथ ही महिला एकल में अपना कांस्य पदक पक्का करने के बाद पदक का रंग बदलने के लिए दीपिका पल्लीकल को वर्ल्ड नंबर निकोल डेविड को हराना था लेकिन वह मजबूत प्रतिद्वंद्वी के सामने कड़ी चुनौती दे पाने में नाकाम रहीं और 4-11, 4-11, 5-11 से हार गईं।
इसके साथ ही उन्हें अब कांस्य पदक से ही संतोष करना पड़ेगा। स्क्वैश के सेमीफाइनल में हारने वाले खिलाड़ियों को कांस्य पदक के लिए मुकाबला नहीं खेलना होता है, दोनों को संयुक्त रूप से कांस्य पदक दिया जाता है।
दीपिका को हराने वाली मलेशिया की निकोल एशियाड में 5 स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं और वह स्क्वैश की सबसे सफल महिला खिलाड़ी हैं।
दूसरी ओर, नरिंदर ग्रेवाल ने वुशू में 60 किग्रा भार वर्ग में पाकिस्तान के अब्दुल्लाह को हराकर सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली। इसके साथ ही उनका एक पदक तो पक्का हो गया है।
जबकि जिम्नास्टिक आर्टिस्टिक में इंडिविजुअल वॉल्ट में दीपा करमारकर अपने तीसरे प्रयास में फाइनल में पहुंचने में कामयाब रहीं। जबकि अरुण रेड्डी अपने पहले ही प्रयास में फाइनल के लिए क्वालीफाई कर लिया।
हॉकी में जीता भारत, लेकिन फुटबॉल में हारे
हॉकी में भारतीय महिला टीम ने जीत के साथ आगाज किया और पूल-बी के अपने पहले मुकाबले में थाइलैंड को 3-0 से हरा दिया।
भारत की ओर से पूनम रानी (15वें), वंदना कटारिया (39वें) और दीपिका (53वें) ने एक-एक गोल दागा। इस मुकाबले में भारतीय टीम ने शुरुआत से ही अपना दबदबा कायम रखा। हालांकि अच्छे प्रदर्शन के बावजूद भारतीय टीम बड़े अंतर से जीत हासिल नहीं कर सकी। भारतीय महिलाएं अपना दूसरा मुकाबला खिताब की प्रबल दावेदार चीन के खिलाफ 24 सितंबर को खेलेंगी।
लेकिन भारतीय फुटबॉल टीम जॉर्डन के हाथों 0-2 से हारकर ग्रुप चरण में ही टूर्नामेंट से बाहर हो गई। जॉर्डन की ओर से स्ट्राइकर लाथ अल्बस्तावे ने 17वें जबकि मिडफील्डर यजान मोहम्मद यूसुफ ने 66वें मिनट में गोल दागा। दो ग्रुप मैचों में भारत ने अभी तक कुल सात गोल खाए हैं। कप्तान सुनील छेत्री एंड कंपनी को कुछ मौके भी मिले लेकिन वे उसका लाभ नहीं उठा सके।
जूडो में खाली हाथ रहा भारत
भारत को उम्मीद थी कि उसके जूडोका इस स्पर्धा में कुछ पदक जीतने में कामयाब होंगे, लेकिन राजविंदर कौर के रेपेचेज में हार के साथ ही भारतीय चुनौती खत्म हो गई।
भारत की ओर से 4 जूडोका cमें एशियाड में हिस्सा लेने गए थे जिसमें 3 महिला और एक पुरुष खिलाड़ी शामिल हैं। ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने 6 पदक जीते थे लेकिन इस बार एशियाई गेम्स में भारत को खाली हाथ लौटने का मजबूर हूआ। कौर के अलावा एल सुशीला देवी, टी कल्पना देवी (महिला) और नवजोत चाना (पुरुष) ने हिस्सा लिया लेकिन पदक नहीं जीत सके।
नौकायन में भारत को निराशा हाथ लगी है। महिलाओं की भारतीय नौकायन टीम लाइटवेट क्वार्डपल स्क्लस स्पर्धा में सबसे नीचले पायदान पर रही। सबसे नीचे होने के कारण इस मुकाबले में भारत की चुनौती टूट गई है।
टेनिस में लगा भारत को बड़ा झटका
भारत को टेनिस से कई पदकों की आस है लेकिन उसकी शुरुआत हार से हुई। भारत की पुरुष और महिला टीम क्वार्टर फाइनल में अपने-अपने मुकाबले हारकर पदक की दौड़ से बाहर हो गई। दोनों ही टीमों को कजाकिस्तान ने हराया।
सनम सिंह की हार के बाद युकी भांबरी ने भारत को पुरुष वर्ग में बराबरी दिला दी लेकिन युगल में साकेथ मायेनी और दीविज शरण की भारतीय जोड़ी 5-7, 5-7 से हार गई। दूसरी ओर, महिला टीम को भी कजाकिस्तान के हाथों 1-2 से हार का सामना करना पड़ा।
तैराकी में पुरुषों की 50 मीटर बैकस्ट्रोक के फाइनल के लिए भारतीय तैराक प्रथापन नायर क्वालीफाई नहीं कर सके। वह 26.85 सेकेंड का समय निकालकर अपनी हीट में छठे स्थान पर रहे। इससे पहले वह 100 मीटर बैकस्ट्रोक में भी नाकाम रहे थे।