51 साल के इस निशानेबाज की जो तस्वीर वायरल हो रही है उसमें वह सफेद रंग की टी-शर्ट पहने एक हाथ जेब में डाले निशाना साध रहे हैं। निशानेबाज रोशनी कम करने के लिए वाइजर (आंख के ऊपर टोपी) या बेहतर फोकस के लिए एक आंख पर ब्लाइंडर (पर्दा) पहनते हैं। यूसुफ बिल्कुल सामान्य ढंग से उतरे और साथी सीवल तरहान के साथ पदक जीता। युसूफ ने कान में पीले इयरप्लग जरूर पहने हुए थे। दरअसल यूसुफ का यही अंदाज है कि वो 2008 बीजिंग से ओलंपिक में हिस्सा ले रहे हैं। वह वाइजर का इस्तेमाल नहीं करते। भारत के शहजर रिजवी भी बिना वाइजर के खेलते हैं जिन्होंने 2018 मेक्सिको के विश्वकप में स्वर्ण और विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक जीता था।
अब यूसुफ ने एक्स का सहारा लेते हुए एलोन मस्क को टैग करते हुए एक पोस्ट किया है। यूसुफ ने लिखा- हाइ एलोन, क्या आपको लगता है कि भविष्य में रोबोट अपनी जेब में हाथ रखकर ओलंपिक में पदक जीत सकते हैं? महाद्वीपों को एकजुट करने वाली सांस्कृतिक राजधानी इस्तांबुल में इस पर चर्चा करना कैसा रहेगा? इस पर मस्क ने जवाब भी दिया है। उन्होंने लिखा- रोबोट हर वक्त टारगेट के सेंटर 'बुल्सआई' पर ही निशाना लगाएंगे। मैं इस्तांबुल जाने के लिए उत्सुक हूं। यह दुनिया के महान शहरों में से एक है।
अब यह देखने वाली बात होगी कि मस्क डिकेच के कहने पर तुर्किये जाते हैं या नहीं। मस्क पेरिस ओलंपिक को लेकर काफी ट्वीट कर रहे हैं। उन्होंने हाल ही में लैंगिक योग्यता के विवाद में फंसी अल्जीरिया की इमाने खेलीफ को लेकर भी बयान दिया था। दरअसल, इमाने के खिलाफ इटली की कारिनी मैच से हट गई थीं। उन्होंने इमाने पर जोरदार पंच मारने का आरोप लगाया था। मस्क ने कहा था कि पुरुष गुणसूत्रों वाले एथलीटों को महिलाओं के खेलों में प्रतिस्पर्धा नहीं करनी चाहिए। इसके अलावा मस्क ने ओलंपिक ओपनिंग सेरेमनी में 'द लास्ट सपर' एक्ट को भी नींदनीय बताया था।