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राजस्थान वाइड गेंद भी डालता तो मुंबई IPL से बाहर हो जाती

Tue, 27 May 2014 04:17 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
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धमाकेदार खेल के दम पर गत चैंपियन मुंबई इंडियंस आईपीएल 7 के प्लेऑफ में पहुंच गई है। लेकिन उसने जिस हिसाब से राजस्थान रॉयल्स को हराकर अंतिम चार में अपनी जगह बनाई उससे सभी को चौंका दिया।
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हालांकि मैच के बाद यह बात किसी को समझ में नहीं आया कि 14.3 ओवर के बाद मुंबई इंडियंस को एक अतिरिक्त गेंद किस हिसाब से दिया गया।

लक्ष्य का पीछा करते हुए मुंबई को 190 रनों का लक्ष्य 87 गेंदों में हासिल करना था और वे इससे ज्यादा गेंद पर जीत हासिल करते तो उन्हें टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ता। लेकिन अंपायर ने स्कोर बराबर होने के बाद सभी को चौंकाते हुए मुंबई को एक अतिमहत्वपूर्ण गेंद दे दी जिसका फायदा उन्हें मिल गया।
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स्कोर बराबर होते ही दोनों टीमों में मची खलबली

मुंबई में वानखेडे स्टेडियम में रविवार को मुंबई इंडियंस और राजस्थान रॉयल्स के बीच हुए मुकाबले में 189 के स्कोर की बराबरी पर जैसे अफरातफरी मच गई थी।

उस समय कुछ सेकंड तक तो किसी की समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर हुआ क्या है, कौन जीतेगा और मैच का परिणाम किस तरह निकलेगा।

दोनों टीमों के डगआउट में कैलकुलेटर चल रहे थे। टीम के रणनीतिकार अंदाजा लगा रहे थे कि अब क्या किया जाना है और मैदान में खिलाड़ी अपने डगआउट की तरफ दिशा-निर्देश के लिए देख रहे थे।

एक रन लेने पर राजस्‍थान से नीचे हो जाती मुंबई

कुछ देर की अफरातफरी के बाद मुंबई इंडियंस को अतिरिक्त गेंद मिली और यह बात सामने आई कि बाउंड्री से ही मुंबई का काम बनेगा और वह प्लेऑफ में पहुंच जाएगी।

गत चैंपियन मुंबई को राजस्थान रॉयल्स के 189 के स्कोर को 14.3 ओवर में पार कर लेना था। यहां पर नेट रन रेट की गणना भी बड़ा पेंचीदा हो गया था।

मुंबई ने जब 14.3 ओवर खेल लिए थे तो उसका स्कोर भी 189 रन था। इस समय मुंबई का नेट रन रेट 0.078099 था जबकि राजस्थान का नेट रन रेट 0.076821 था। यदि मुंबई ने चौथी गेंद पर एक रन लिया होता तो उसका नेट रन रेट राजस्थान रॉयल्स से नीचे चला जाता। चूंकि मुंबई को एक अतिरिक्त गेंद मिली थी और उसे अपना स्कोर उस गेंद पर कम से कम 191 तक पहुंचाना था।

मुंबई के लिए जीत से ज्यादा अहम थी बाउंड्री

मुंबई इंडियंस को एक अतिरिक्त गेंद मिली पर लेकिन यहां दो रन से काम नहीं चल सकता था क्योंकि एक रन भागते ही मुंबई को जीत मिल जाती। राजस्‍थान से रन रेट बेहतर करने के लिए मुंबई के पास आखिरी विकल्प सिर्फ बाउंड्री थी।

मेजबान टीम यदि चौथी गेंद पर कोई रन नहीं बना पाती तो भी वह मुकाबले से बाहर नहीं होती। वह पांचवीं या छठी गेंद पर भी बाउंड्री लगाकर अपना नेट रन रेट राजस्थान से बेहतर कर सकती थे।

यदि 15वें ओवर की अंतिम 3 गेंदों पर कोई रन नहीं बनता तो मुंबई को 16वें ओवर की पहली गेंद पर छक्के की जरूरत होती जिससे उसका नेट रन रेट राजस्थान से ऊपर चला जाता। इस सूरत में मुंबई का नेट रन रेट 0.080519 होता जबकि राजस्थान का 0.074163 होता लेकिन इस स्थिति की नौबत नहीं आई और आदित्य तारे ने जेम्स फॉकनर की चौथी गेंद पर छक्का मारकर मैच निपटा दिया।
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राजस्‍थान का टीम प्रबंधन हिसाब लगाने में चूका

दूसरी ओर, राजस्थान रॉयल्स की टीम को मुंबई के हाथों हारकर अंतिम क्षणों में आईपीएल से बाहर होना पड़ा। 14वें ओवर में अंबाती रायडू का विकेट झटकने के बाद रॉयल्स प्लेऑफ के करीब पहुंच गया था। लेकिन अंपायरों ने मुंबई को एक अतिरिक्त बॉल का मौका दे दिया।

लेकिन रॉयल्स का टीम प्रबंधन आखिरी गेंद पर अपनी गणना में चूक कर गया और डगआउट से कोई भी गेंदबाज फॉकनर को यह नहीं बता पाया कि उन्हें आखिरी गेंद किस तरह करनी है।

फॉकनर को यदि थोड़ा भी संकेत मिलता तो वह शायद बेहतर गेंद डाल पाते। अगर वह व%E
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