मेरा मानना है कि हम बतौर टीम हर मंच पर निरंतर बेहतर प्रदर्शन करेंगे तो दुनिया की किसी भी टीम को हरा सकते हैं। पेनल्टी कॉर्नर पर ज्यादातर ड्रैग फ्लिक से गोल करने की जिम्मेदारी टीम में मेरी रहती है। भारतीय टीम में शामिल होने के बाद मैंने ड्रैग फ्लिकिंग की बारीकियां समझी और खुद को इसमें पारंगत किया। मुझे भारतीय टीम में बराबर मौका मिलता रहा तो मेरा आत्मविश्वास भी बढ़ता रहा।
अब एक अच्छी बात यह है कि हमारी कप्तान रानी रामपाल और दीपग्रेस एक्का भी ड्रैग फ्लिक के साथ इनडायरेक्ट गोल करने का दम रखती है। मैच की जरूरत के मुताबिक हममें से जो भी गोल करने के लिए बेहतर स्थिति में होती है वही पेनल्टी कॉर्नर पर प्रतिद्वंद्वी टीम के गोल पर निशाना साधती है।’
गुरजीत के इस कामयाब सफर में उनके हॉकी प्रेमी दादा मक्खन सिंह और पिता सतनाम की हौसलाअफजाई का बड़ा योगदान है। वह कहती हैं, पिछले छह महीनों में हमने जापान, चीन, आयरलैंड जैसी टीमों के खिलाफ जरूर अच्छा प्रदर्शन किया है। हम यदि राष्ट्रमंडल खेलों के चैंपियन ऑस्ट्रेलिया के जापान में अच्छा प्रदर्शन करेंगे तो इससे हमारी टीम का अक्टूबर-नवंबर में ओलंपिक क्वॉलिफायर्स से पहले हौसला बहुत बढ़ेगा।
पहले मैं अपनी साथियों से बात-संवाद करने में हिचकती थी। मेरे दिल की बात दिल में ही रह जाती थी। मुझे अब यह बात समझ आ गई है कि टीम की कामयाबी में बराबर बेहतर संवाद खासा अहम है। अब तो मैं इतना बोलती हूं कि चुप ही नहीं रहती हूं। इससे मुझे अपनी साथियों की उन्हें मेरी दिल की बात बहुत जल्द समझ आने लगी है। आज की मॉडर्न हॉकी में किसी भी खिलाड़ी का एकदम फिट रहना उसके कामयाब होने की अहम शर्त है।
बतौर खिलाड़ी आपको लगातार फिट रहने के लिए अपने डायटिशियन की राय के मुताबिक ही खाना पड़ता है। ऐसे में आपको कई चीजों को छोडना पड़ता है। मैंने ब्रेकफास्ट छोड़ दिया है और मैं लंच और डिनर ही लेती है। हमारी टीम में हर खिलाड़ी को जो डायटिशियन ने जो डाइट चार्ट दिया है हम सभी उसका शिद्दत से पालन करती हैं।’
गुरजीत कहती हैं, मैं हॉकी में आज जहां भी पहुंच पाई हूं उसमें मुझे अपने परिवार का पूरा समर्थन और सहयोग मिला। एशियाई खेलों में घुटने में लगी चोट के ऑपरेशन के बाद भी परिवार के साथ टीम की हर खिलाड़ी ने पूरा सहयोग मिला। सभी ने बराबर मेरी हौसलाअफजाई की और इसी के चलते मैं फिट होकर टीम में मजबूती से वापसी कर पाई।’