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हॉकी महिला विश्व कप में हमारा पहला लक्ष्य क्वॉर्टर फाइनल : वंदना कटारिया

Tue, 17 Jul 2018 04:19 AM IST
सत्येंद्र पाल सिंह, नई दिल्ली, अमर उजाला
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वंदना कटारिया
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वंदना कटारिया की गिनती भारत की बेहतरीन हॉकी स्ट्राइकर में होती है। वह भारत की  21 जुलाई से लंदन में शुरू हो रहे महिला हॉकी विश्व कप में कप्तान रानी रामपाल, नवजोत कौर और लालरेसियामी के साथ आक्रमण की सूत्रधार होंगी। वंदना भारत की एशियाई खेलों और जूनियर महिला विश्व कप में कांसा, एशिया कप में स्वर्ण और रियो ओलंपिक में शिरकत करने वाली टीम की अहम सदस्य रहीं। हरिद्वार में बीएचईएल से सटे रोशनाबाद गांव की वंदना ने अभावों से जूझते हुए भारतीय टीम में अपनी खास जगह बनाई है।  

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26 वर्षीया वंदना ने भारत की महिला हॉकी टीम के  टीम के लंदन रवाना होने से पहले 'अमर उजाला' ने कहा, 'लंदन विश्व कप में हम मेजबान इंग्लैंड के खिलाफ मैच में अच्छे आगाज पर लगा रहे हैं। इंग्लैंड के खिलाफ मैच को लेकर किसी तरह के दबाव में नहीं हैं। हम गोल्ड कोस्ट में उसे हरा भी चुके हैं और उससे हार भी चुके हैं। उसके खिलाफ मैच में नतीजा इस पर निर्भर करेगा कि दिन विशेष हम कैसा खेलते हैं।'

उन्होंने आगे कहा, 'विश्व कप में हमारा पहला लक्ष्य है क्वॉर्टर फाइनल है और हमारी टीम में इसे हासिल करने का दम है। एक बार हमने इसे हासिल कर लिया तो फिर कुछ भी मुमकिन है। हमें इसके तुरंत जकार्ता में हमारी टीम का मकसद एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीत कर सीधे रियो ओलंपिक के लिए क्वॉलिफाई करना है। हमारी टीम में हर साथी  दूसरी को हर मैच में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए प्रेरित करती है। हमारी सभी खिलाड़ी कोच द्वारा बनाए 'स्ट्रक्चर' के मुताबिक खेल रही हैं।'
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भारत के लंदन महिला विश्व कप में खेलने से उतरने से पहले 200 मैचों में 61 गोल कर चुकी वंदना कहती हैं, 'हमारी महिला टीम की ताकत हमारा आक्रामक खेल है अैर ड्रैग फ्लिकर गुरजीत कौर हैं। हमारे हमलों की 'लीडर' हैं कप्तान रानी रामपाल। रानी स्ट्राइकर के रूप में मेरे साथ लालरेमसियामी, नवजोत का पूरा सहयोग करती हैं। हमारा आक्रमण धारदार रहेगा तो हम किसी भी टीम को हरा सकते हैं। अग्रिम पंक्ति में  चाहे मैं हूं, कप्तान रानी,नवजोत ,नवनीत कौर हमारा पहला मकसद मैदानी गोल करना है।' 

वंदना ने साथ ही कहा, 'डी में पहुंचने के बाद यदि मैदानी गोल का मौका न दिखे तो टीम को पेनल्टी कॉर्नर दिलाने की पूरी कोशिश करना है। साथ ही हमें पेनल्टी कॉर्नर को रोकने के लिए अपने किले की चौकसी में भी मदद करनी होगी। हमारे पास  पेनल्टी कॉर्नर का इस्तेमाल करने के गुरजीत कौर पर बेहतरीन ड्रैग फ्लिकर तो हैं ही दीपिका ठाकुर और रानी रामपाल इस पर 'इनडायरेक्ट' गोल करने का दम रखती है।' 

भारतीय महिला हॉकी खिलाड़ी ने साथ ही कहा, 'हमारी रक्षापंक्ति की लीडर उपकप्तान और गोलरक्षक उपकप्तान सविता पूनिया और डिफेंडर के रूप मे दीपिका ठाकुर 'डिफेंस' की लीडर हैं। हमारी टीम में हर सीनियर खिलाड़ी जूनियर का पूरी तरह मार्गदर्शन कर उसे मैदान पर बेस्ट करने के लिए जेहनी तौर पर तैयार करने में मदद करती हैं। मैंने जबसे हॉकी खेलना शुरू किया मैं दीपिका ठाकुर के खेल की मुरीद रही हूं। वह पहले फॉरवर्ड के रूप में खेलती थी। रानी रामपाल और दीपिका दीदी ही हमारी मौजूदा टीम की  2010 में भारत की महिला विश्व कप में नुमाइंदगी कर चुकी, दो खिलाड़ी हैं। इन दोनों का यह अनुभव हमारी टीम के बहुत काम आएगा।' 

वह बताती हैं, 'चीफ कोच की अदला बदली से बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ता क्योंकि टीम को जरूरत 'स्ट्रक्चर' के मुताबिक खेलने की होती है। हरेन्द्र सर और सोएर्ड मराइन दोनों ही कड़क कोच हैं। दोनों ही गलती पर खूब डांटते हैं। हरेन्द्र सर के साथ बस आसानी यही होती थी कि वह हिन्दी में बात करते हैं और इसे समझने में आसानी होती है। 

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