चैंपियंस ट्रॉफी में नीदरलैंड पर 3-2 की जीत ने भारतीय टीम को जश्न बनाने का मौका दिया है। हम काफी लंबे समय से डच टीम के खिलाफ बड़े स्कोर के साथ नहीं जीत पाए हैं।
आखिरी बार भारत ने डच टीम को 18 साल पहले किसी बड़े टूर्नामेंट में हराया था। शुरुआत में लगातार दो मैच हारने की निराशा को पीछे छोड़ने वाली भारतीय टीम को श्रेय मिलना चाहिए जिसने शानदार प्रदर्शन किया और ऐसी टीम को हराया खिताब की प्रबल दावेदार है और पेपर में उसकी लाइनअप सर्वश्रेष्ठ है।
भारतीय टीम ने मिडफील्ड में पकड़ बनाई और सर्कल में तीक्ष्ण हमले किए। भारत ने डच टीम पर आखिरी बार 1996 में अटलाटका ओलंपिक से पहले हुए क्वालीफाइंग टूर्नामेंट में जीत हासिल की थी। यह संयोग है कि जब भारत ने आखिरी बार डच टीम को हराया था तब उस डच टीम के कोच आज के भारतीय टीम के कोच रोलैंट ओल्टमैंस थे।
इस जीत से भारत का अपने ग्रुप में तीसरे स्थान पर रहना तय हो गया है। अब भारत का क्वार्टर फाइनल में बेल्जियम से मुकाबला होना भी तय हो गया है और मेरी नजर में पिछले कुछ सालों में इस टीम ने खुद में सबसे ज्यादा सुधार किया है।
भारत के सामने एक कठिन चुनौती है और टीम से बहुत ज्यादा उम्मीद करना उचित नहीं है। भारत से हार के बावजूद डच टीम ग्रुप में अभी भी शीर्ष पर है। नीदरलैंड के खिलाफ भारतीय टीम एक योजना के तहत खेली।
हमने संतुलित खेल खेला और समन्वय के साथ आक्रामक किया। इस मैच में भारतीयों के खेल में पिछली दो हारों के निशान नहीं दिखाई दिए। वहीं एक अन्य मुकाबले में बेल्जियम ने इंग्लैंड से 1-1 से ड्रॉ खेला। बेल्जियम टूर्नामेंट में एक जीत और दो ड्रॉ के साथ अजेय रही है।
(के2 कम्यूनिकेशन)