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हॉकी विश्व कप 2018: भारत को मिला है हर मैच में नया हीरो

Mon, 10 Dec 2018 05:27 AM IST
विशेष संवाददाता, भुवनेश्वर
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भारतीय टीम ने पूल में शीर्ष पर रहकर सीधे हॉकी विश्व कप के यहां क्वार्टर फाइनल में स्थान बना कर पहला पड़ाव पार कर लिया। अपने उस्ताद हरेन्द्र सिंह के हॉकी के सबक की छाप भारतीय टीम के अब तक प्रदर्शन पर साफ दिखाई दी है।

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भारत ने पिछड़ने के बाद मैच में वापसी ही नहीं बल्कि जीत का जज्बा भी दिखाया। हरेन्द्र भारतीय टीम की किसी मैच में जीत का श्रेय एक खिलाड़ी नहीं बल्कि पूरी टीम को देते हैं। हरेन्द्र और भारतीय टीम का जोर स्ट्रक्चर के साथ हॉकी खेलने पर है।

भारतीय टीम की अब तक के तीन में से दो मैचों में जीत और एक में ड्रॉ का सबब यही है कि हर मैच के लिए मेजबान टीम के पास एक नया हीरो रहा। भारत के लिए अब तक तीन मैचों में सबसे ज्यादा तीन-तीन गोल स्ट्राइकर सिमरनजीत सिंह और बनारस के ललित उपाध्याय ने किए हैं। आकाशदीप सिंह और मनदीप सिंह का मानना है कि एकजुट टीम में हर कोई स्ट्रक्चर से खेल कर कोच हरेन्द्र सिंह की रणनीति को अमला जामा पहनाने की कोशिश करते हैं।

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फिटनेस है टीम की ताकत 

भारत की टीम की एक और बड़ी ताकत जो अब तक दिखी वह यह है उसकी फिटनेस। मैच में चार क्वार्टर यानी पूरे 60 मिनट में एक ही रफ्तार और जोेश से हमले बोलने का दम रखने के कारण आखिरी क्षणों में बाजी पलटने का दम रखती है।

अतीत में भारत के गजब के वैयक्तिक कौशल वाले जीनियस खिलाड़ी जरूर रहे हैं लेकिन टीम के रूप में वह  बहुत कामयाब नही हो पाया। भारत ने इससे सबक लिया है। भारतीय हॉकी को अब 1975 में कुआलालंपुर में हॉकी विश्व कप जीतने के बाद से इसमें फिर पदक जीतने का इंतजार है।

श्रीजेश पर कायम है कोच का भरोसा 

भारत ने अब तक तीन मैचों में 12 गोल किए और महज तीन गोल खाए हैं। भारतीय गोलरक्षक पीआर श्रीजेश के पिता रविंदभनन की तबीयत भले ही अब ठीक है लेकिन जेहनी तौर पर शायद अब भी पिता को लेकर चिंतित है।

श्रीजेश बेशक भारत ही नहीं दुनिया के शीर्ष गोलरक्षकों में से एक हैं लेकिन इस बड़े मैच पर जितना एकाग्र और पूरी तरह फोकस होने की जरूरत है उतने वह नहीं दिख रहे है। अच्छी बात यह है कि टीम प्रबंधन में चीफ कोच हरेन्द्र सिंह का उन पर भरोसा कायम है।
 
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ललित साबित हो रहे हैं तुरुप का इक्का 

विश्व कप हॉकी में भारतीय टीम के लिए बनारस के ललित उपाध्याय तुरुप का इक्का साबित हो रहे हैं। चौबीस बरस के ललित भारत के लिए 92 मैच खेल चुके हैं।

कनाडा के खिलाफ उन्होंने दो गोल किए। उनका कहना है कि हमारा जोर फिनिशिंग पर है। हम इसी पर बराबर मेहनत कर रहे हैं।’
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