'हमने इसके बाद बेंगलुरू में इन छोटी-छोटी गलतियों खासतौर पर हमारे स्ट्राइकरों ने 'डी' के भीतर अपनी सटीक निशानेबाजी के बूते मैदानी गोल करने और पेनल्टी पर गोल करने के कौशल को बेहतर करने पर खासी मेहनत की। हम किसी भी टीम को हल्के लेने की गलती से बचकर अपने बेहतर खेल के बूते हर मैच जीतने पर फोकस हैं। स्ट्राइकर आकाशदीप और ड्रैग फ्लिकर रूपिंदर के फिट होकर लौटने से टीम का संयोजन बेहतर हुआ । यह न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज में एकदम सटीक लगा।'
वह कहते हैं, 'एशियाई खेलों में हमारी टीम की ताकत आकाशदीप, मनदीप और दिलप्रीत सरीखे स्ट्राइकर और पेनल्टी कॉर्नर पर रंग में चल रहे हमारे ड्रैग फ्लिकरों की जुगलबंदी हैं। मुझ सहित टीम के हर स्ट्राइकर की कोशिश मैदानी गोल करने के हर मौके भुनाने के साथ ज्यादा से ज्यादा पेनल्टी कॉर्नर दिलाने की रहेगी। हमारे पास रूपिंदर, हरमनप्रीत, वरुण और अमित रोहिदास के रूप में पेनल्टी कॉर्नर पर 'ड्रैग फ्लिकर' की एक ऐसी मजबूत बैटरी है, जो किसी भी टीम के किले को ध्वस्त कर गोल करने का दम रखती है।'
'सबसे अच्छी बात यह है कि हमारे कोच हरेन्द्र खासे सख्त हैं और शायद उनकी सख्ती ही टीम से बेहतर प्रदर्शन कराने के लिए जरूरी है। हरेन्द्र सर की सख्ती और डर के चलते ही हमारी टीम ब्रेडा चैंपियंस ट्रॉफी में दमदार प्रदर्शन कर रजत पदक जीत पाई है।'
सुनील कहते हैं, 'हम पाकिस्तान के खिलाफ चैंपियंस ट्रॉफी में भी खेले और उसके खिलाफ दमदार जीत हासिल करने में सफल रहे। जहां तक भारतीय टीम के पूर्व हॉकी के पूर्व हॉकी उस्ताद रोलैंट ओल्टमैंस के पाकिस्तान के चीफ कोच होने पर हमारे खिलाडिय़ों की रणनीति से वाकिफ होने की बात है तो हम भी उनकी कोचिंग की शैली से वाकिफ हैं। हम यह भी जानते हैं कि वह खिलाड़ियों को किस शैली और कैसे खिलाते हैं।'
'यूं भी पाकिस्तान की टीम हमारे पूल में नहीं है तो हम उसकी बाबत सोच कर यूं ही क्यों दुबले हों। हमारे कोच हरेन्द्र सर का टीम के लिए मंत्र यही है प्रतिद्वंद्वी के नाम की बाबत नहीं सोचे फिर चाहे वह पाकिस्तान या अन्य कोई। प्रतिद्वंद्वी कोई भी हो उसके खिलाफ जीत और जीत के मानस से उतरो और भारतीय टीम की सोच यही है। हमारी टीम इस सोच से इन एशियाई खेलों में उतरेंगे और अपने मकसद को पाने में कामयाब होंगे।'