पहले राष्ट्रमंडल खेलों और फिर लंदन में महिला विश्व कप में हमारी टीम ने अपनी कमजोर फिनिशिंग को बेहतर करने और पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलने के लिए चार दिन के शिविर में बेंगुलरू में खासी तवज्जो दी। हमने अपनी छोटी से छोटी खामी को दूर करने की पुरजोर कोशिश की है। मुझे पूरा भरोसा है कि हमारी टीम एशियाई खेलों में गोल के अभियान बनाने के साथ बेहतर फिनिशिंग दिखाते हुए खूब मैदानी गोल करेगी।
हमारी लड़कियां दुनिया की बेहतरीन टीम की मौजूदगी में दमदार प्रदर्शन के बाद जकार्ता में पिछली बार के कांसे को जकार्ता एशियाई खेलों में सोने में तब्दील कर सीधे ओलंपिक के लिए क्वॉलिफाई करने का दम रखती है। हमारी लड़कियों को यह बात ठीक से समझ में आ गई है गोल के अभियान बनाने के साथ उन्हें गोल में बदलना सबसे अहम है। यूं भी महिला हॉकी विश्व कप में दक्षिण कोरिया, जापान और चीन जैसी एशियाई टीमों में अकेली हमारी टीम ही क्वॉर्टर फाइनल में स्थान बनाने में सफल रही। हममें है दम, हम होंगे कामयाब, जीतेंगे एशियाई खेलों में महिला हॉकी खिताब।'
मिजोरम का नाम देश को बेहतरीन फुटबॉल देने के लिए लिया जाता है। फुटबॉल के इस प्रदेश ने देश को 18 बरस की ललरेमसियामी के रूप में ऐसी बेहतरीन हॉकी स्ट्राइकर दी जिसका लोहा लंदन विश्व कप में दुनिया के हर हॉकी कमेंटटेर ने माना। लंदन विश्व कप खेलने से ललरेमसियामी में नया विश्वास आया है।
ललरेमसियामी ने पूरे जोश से कहा, 'हमारी टीम को लंदन विश्व कप में क्वॉर्टर फाइनल में शूटआउट में हारने का मलाल जरूर था। हम इसे भुलाकर बेहतरीन फिनिशिंग और हर मौकों को भुना गोल कर एशियाई खेलों खिताब जीतने के मकसद को हकीकत में तब्दील करने के भरोसे के जकार्ता जा रहे हैं। हमारी टीम अति आत्मविश्वास से दूर है लेकिन उसे एशियाई खेलों में उसे खिताब जीतने का विश्वास जरूर है।
रानी दीदी, वंदना दीदी सभी के साथ लंदन विश्व कप में खेलने में बहुत मजा आया। रानी, वंदना, उदिता, नवजोत और मैं आक्रामक हॉकी खेल कर बेहतर फिनिशिंग पर तवज्जो दे रहे हैं। विश्व कप के बाद बेंगलुरू में चार दिन के शिविर के बाद मुझे भरोसा है कि एशियाई खेलों में हम पेनल्टी कॉर्नर का तो बेहतर ढंग से इस्तेमाल करेंगे ही मैदानी गोल भी पहले से ज्यादा करेंगे।
indian women hockey team
दीपग्रेस एक्का बहुत चपल भले ही न हों लेकिन वहे भारत की महिला हॉकी टीम के किले की अपनी साथी फुलबैक सुनीता लाकड़ा और दीपिका के साथ मिलकर बहुत मजबूती से करती हैं। अपने दूसरे लगातार दूसरे एशियाई खेलों में शिरकत करने जा रही 24 बरस की ओडिशा की दीपग्रेस एक्का कहती हैं, 'हमारी टीम लंदन विश्व कप में क्वॉर्टर फाइनल में शूटआउट में मिली हार को भुला चुकी है।
हमारी टीम का फोकस अब अब बेहतर फिनिशिंग के बूते ज्यादा मैदानी गोल कर इस बार एशियाई खेलों में सुनहरा तमगा जीतने पर है। विश्व कप के बाद बेंगलुरू में कैंप में तवज्जो हर मैच में गोल करने पर रहा। हमारी कप्तान रानी रामपाल, वंदना कटारिया, ललरेमसियामी, नवजोत कौर सभी ने महिला विश्व कप में गोल करने के बहुत अभियान बनाए बस कमजोर फिनिशिंग के चलते अहम मौकों हम चूक गए।