ग्राहम रीड को हॉकी इंडिया भारत की पुरुष हॉकी टीम का चीफ कोच बनाना भले ही तय कर चुका है, लेकिन खेल मंत्रालय से फिलहाल उनके नाम को मुहर लगती नहीं दिख रही है। जब इस बारे में हॉकी इंडिया की सीईओ से पूछा गया तो उन्होंने ‘अमर उजाला’ से कहा, ‘रीड की फाइल अभी भी खेल मंत्रालय के पास है। मंत्रालय की मंजूरी के बाद ही रीड की नियुक्ति की बाबत अंतिम फैसला होगा।’
खेल मंत्रालय से जुड़े सूत्र बताते हैं मंत्रालय को रीड की करीब 15 हजार डॉलर महीना तनख्वाह से दिक्कत नहीं है। जो भारतीय रुपये में सालाना करीब 90 लाख रुपये होगी। दिक्कत रीड के साल में पांच छह बार ऑस्ट्रेलिया आने-जाने की शर्त को लेकर है।
भारत से ऑस्ट्रेलिया जाने और आने की एयर इंडिया की बिजनेस क्लास की टिकट ही करीब दो लाख रुपये की है। रीड यदि साल में छह बार ऑस्ट्रेलिया आते-जाते हैं गए तो इसके लिए मंत्रालय को सालाना 12 लाख रुपये और खर्च करने होंगे। ऐसे में खेल मंत्रालय को रीड को सालाना एक करोड़ रुपये से ज्यादा देने पड़ेंगे।
क्या मंत्रालय इसके लिए तैयार होगा जो कि खासा महंगा सौदा है। बड़ा सवाल यह है कि रीड क्या हर दूसरे महीने ऑस्ट्रेलिया जाने आने की शर्त छोड़ने को तैयार होंगे इसको लेकर असमंजस बरकरार है। इस बारे में रीड ने यदि रिक चाल्सवर्थ और टैरी वॉल्श की सलाह ली तो वह इस पद को संभालने से इनकार भी कर सकते हैं।
यदि रीड किसी भी कारणवश अंतिम समय में भारत के चीफ कोच का पद संभालने से इनकार करते हैं तो यह भारतीय सीनियर हॉकी टीम के लिए मुश्किल का सबब बन जाएगा। हॉकी इंडिया इसी का हवाला देकर रीड की जल्द से जल्द नियुक्ति के लिए खेल मंत्रालय पर दबाव बनाने की रणनीति अपना सकता है।