भारतीय हॉकी टीम को वर्ष 2018 में आशा के बजाय निराशा ज्यादा झेलनी पड़ी। भारत ब्रेडा में चैंपियंस ट्रॉफी में रजत और एशियन चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में धुलने के चलते पाकिस्तान के साथ संयुक्त विजेता रहा। भारतीय हॉकी टीम गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों में चौथे स्थान पर रही और उसने जकार्ता एशियाई खेलों में कांसा जीता।
भुवनेश्वर में टीम विश्व कप में नीदरलैंड से क्वार्टर फाइनल में 1-2 से हारकर छठे स्थान पर रही। टीम रैंकिंग में जरूर अपना पांचवां स्थान बरकरार रखने में कामयाब रही। कप्तान मनप्रीत सिंह कहते हैं, 'हमें विश्व कप में प्रशंसकों के अपार समर्थन का लाभ न उठा पाने का बेहद मलाल है। हमारे लिए 2018 की निराशा को भुलाकर आगे बढ़ने का वक्त है।'
उन्होंने आगे कहा, 'बेहतर होता हम 2014 के एशियाई खेलों की तरह 2018 में जकार्ता एशियाई खेलों में भी स्वर्ण जीत कर सीधे ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करते। अब हमारे लिए 2020 के लिए ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने की राह खासी चुनौतीपूर्ण रहने वाली है, लेकिन यह चुनौती हमारे उत्साह को कम नहीं कर सकती।'