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ध्यानचंद का वो एक फैसला, जिसने हॉकी जगत को कर दिया था हैरान

Mon, 09 Oct 2017 11:59 AM IST
amarujala.com-presented by: मुकेश झा
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मेजर ध्यानचंद
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मेजर ध्यानचंद भारतीय हॉकी के भूतपूर्व खिलाड़ी एवं कप्तान थे। हॉकी के क्षेत्र में दद्दा को भारत एवं विश्व में सबसे बेहतरीन खिलाड़ियों में शुमार किया जाता है। वे तीन बार ओलंपिक के स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम के सदस्य रहे हैं, जिनमें 1928 का एम्सटर्डम ओलंपिक, 1932 का लॉस एंजिलिस ओलंपिक एवं 1936 का बर्लिन ओलंपिक शामिल है। 
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मेजर ध्यानचंद को तेजी से गोल करने और 3 बार ओलंपिक से गोल्ड मेडल लाने के लिए जाना जाता है। ध्यानचंद का असली नाम ध्यान सिंह था। मगर वह रात को चन्द्रमा की रोशनी में प्रैक्टिस किया करते थे। इसलिए दद्दा के साथियों ने इनके नाम के पीछे चंद लगा दिया।

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ध्यानचंद 16 साल की उम्र में 'फर्स्ट ब्राह्मण रेजिमेंट' में एक साधारण सिपाही के रूप में भर्ती हुए थे। मगर वे भारतीय सेना में मेजर के पद तक गए। दरअसल, एक बार कुछ ऐसा हुआ कि शक के चलते नीदरलैंड में एक मैच के दौरान दद्दा की हॉकी स्टिक तोड़कर देखी गई कि कहीं स्टिक में कोई चुम्बक तो नहीं लगी। मगर उनके हाथ कुछ नहीं लगा क्योंकि जादू हॉकी स्टिक में नहीं ध्यानचंद के हाथों में था। 
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एक बार की बात है जब दद्दा ने शॉट मारा तो बॉल पोल पर जाकर लगी तो उन्होनें रेफरी से कहा की गोल पोस्ट की चौड़ाई कम है। जब गोलपोस्ट की चौड़ाई मापी गई तो सभी हैरान रह गए। वाकई गोलपोस्ट की चौड़ाई कम थी। ऑस्ट्रेलिया के महान क्रिकेटर सर डोनाल्ड ब्रैडमैन ने 1935 में एडिलेड में एक हॉकी मैच देखने के बाद कहा था, 'ध्यानचंद ऐसे गोल करते हैं जैसे क्रिकेट में रन बनता है।' ब्रैडमैन हॉकी के जादूगर से उम्र में तीन साल छोटे थे। अपने-अपने खेल में माहिर ये दोनों हस्तियां केवल एक बार एक-दूसरे से मिलें।
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ध्यानचंद को भारत रत्न दिलाने के लिए हस्ताक्षर करें यहां- goo.gl/hYuwMF
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