ललित उपाध्याय ने 'अमर उजाला’ से फोन पर कहा, 'हमारी टीम का फोकस अपने प्रतिद्वंद्वी की बजाय हमेशा अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पर रहता है। हमने बेल्जियम दौरे पर बेल्जियम और स्पेन के खिलाफ ध्यान अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पर लगाया और अपने सभी पांचों मैच जीतने में कामयाब रहे। हमारी भारतीय टीम आत्मविश्वास से भरी हे और भुवनेश्वर में रूस के खिलाफ ओलंपिक क्वॉलिफायर्स के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हमारे ऑस्ट्रेलियाई हॉकी उस्ताद ग्राहम रीड का जितना जोर आक्रमण पर है उतना ही मजबूत रक्षण पर भी है।
रीड कहते हैं अंतरराष्ट्रीय हॉकी में बराबर कामयाबी के लिए अटैक के साथ रक्षण पर पूरी तवज्जो जरूरी है। रीड कहते हैं कि यदि आपका आक्रमण अच्छा है तो आप एक-दो मैच जीत सकते हैं। आक्रमण के साथ टीम का रक्षण भी अच्छा होगा तभी ज्यादा टूर्नामेंट जीतेगी। गोल कर दबाव बनाए रखने के लिए अपने किले की भी मजबूत चौकसी बेहद जरूरी है। हमारी पूरी टीम ने खुद को उस्ताद रीड के रंग में ढाल दिया है।’
वह कहते हैं, 'बेल्जियम दौरे पर हमने मैदानी गोल तो किए ही हमारे ड्रैग फ्लिकरों ने पेनल्टी कॉर्नरों पर ड्रैग फ्लिक से अचूक निशाने जमा गोल किए। यह दर्शाता है कि हमारी टीम ओलंपिक क्वॉलिफायर्स के लिए रंग में है और आत्मविश्वास से भरी है। जब टीम रंग में होती है तब खामियों की ओर ध्यान कम ही जाता है। इसके बावजूद हम रूस के खिलाफ ओलंपिक क्वॉलिफायर्स में किसी तरह की ढील नहीं बरतेंगे। हमने बेल्जियम दौरे पर कुल 20 गोल किए, इनमें से 13 मैदानी गोल किए। बाकी सात गोल पेनल्टी कॉर्नर पर हमारे ड्रैग फ्लिकर ने किए। हमारे तुरुप के ड्रैग फ्लिकर हरमनप्रीत सिंह ने पेनल्टी कॉर्नर पर सबसे ज्यादा पांच गोल कर दिखाया कि वह और हमारी टीम रूस के खिलाफ ओलंपिक क्वॉलिफायर्स के लिए पूरे रंग में है।
भुवनेश्वर में चल रहे टीम के शिविर में जो कुछ भी मामूली खामियां रह गई थीं उन्हें ओलंपिक क्वॉलिफायर्स से पहले सुधारने पर है। हमारी टीम रूस के खिलाफ एक इकाई के रूप में आक्रमक हॉकी खेलने के साथ किले की मजबूत चौकसी कर ओलंपिक क्वॉलिफायर्स से टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने को कमर कस चुकी है।’