भारतीय हॉकी टीम शनिवार को जब अपने आखिरी राउंड रॉबिन मैच में मेजबान नीदरलैंड्स के खिलाफ उतरेगी तो उसका लक्ष्य कम से कम ड्रॉ होगा। आठ बार के ओलंपिक चैंपियन भारत को लगातार दूसरी बार फाइनल में पहुंचने के लिए हर हाल में नीदरलैंड्स को बराबरी पर रोकना होगा।
वहीं मेजबान टीम को जीत की दरकार है। पीआर श्रीजेश की टीम दो जीत, एक ड्रॉ और एक हार से सात अंकों के साथ अंक तालिका में दूसरे नंबर पर है। गत चैंपियन और विश्व विजेता ऑस्ट्रेलिया दस अंकों के साथ पहले ही रविवार को होने वाले फाइनल का टिकट कटा चुकी है। राउंड रॉबिन में शीर्ष पर रहने वाली दो टीमें खिताबी मुकाबले में खेलेंगी।
नए कोच हरेन्द्र सिंह के मार्गदर्शन में भारतीय टीम ने अपने अभियान को शानदार आगाज किया था। पाकिस्तान को 4-0 से धोने के बाद उसने अर्जेंटीना को 2-1 से हराकर सभी को चौंका दिया था। हालांकि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वह कड़े मुकाबले में 1-2 से हार गई थी, लेकिन बेल्जियम के खिलाफ अंतिम क्षणों में गोल कर मैच ड्रॉ करवाने में सफल रही थी।
फिर भारत-ऑस्ट्रेलिया में हो सकता है फाइनल : भारत के लिए फाइनल में पहुंचना आसान है। ड्रॉ से ही उसका काम हो जाएगा। अगर ऐसा होता है तो यह 2016 में हुई पिछली चैंपियंस ट्रॉफी का ही रिपीट होगा। लंदन में हुए खिताबी मुकाबले में भारत को ऑस्ट्रेलिया के हाथों हारकर रजत पदक से ही संतोष करना पड़ा था। इस बार भारत के पास फाइनल में पहुंचकर पिछली हार का बदला लेने और पहली बार इस ट्रॉफी को जीतने का आखिरी मौका है। आखिरी बार चैंपियंस ट्रॉफी का आयोजन हो रहा है।
ऑस्ट्रेलिया की टक्कर अर्जेंटीना से: ऑस्ट्रेलिया का सामना ओलंपिक चैंपियन अर्जेंटीना से होगा। ऑस्ट्रेलिया के लिए यह औपचारिक मैच होगा। हालांकि वह जीत के साथ बढ़े हुए मनोबल के साथ फाइनल में जाना चाहेगी।