कहने को भारत ने हॉकी वर्ल्ड लीग राउंड-2 के अपने दूसरे मैच में ओमान पर 9-1 से बड़ी जीत दर्ज की लेकिन सही मायनों में भारतीय टीम के खिलाफ हार का यह अंतर ओमान जैसी टीम के लिए नैतिक जीत के समान रहा।
जर्मन कोच ओलिवर कुर्ट्ज के संरक्षण में खेल रहे ओमान के खिलाड़ियों का कुछ रक्षण और कुछ भारतीय टीम के लचर खेल ने जीत के अंतर को सीमित कर दिया। वरना फिजी के खिलाफ गोलों की बरसात मेजर ध्यानचंद स्टेडियम पर बुधवार को एक बार फिर देखी जा सकती थी।
खेल के दूसरे ही मिनट में भारत को पहले पेनाल्टी कार्नर पर रघुनाथ की ड्रैग फ्लिक ने सफलता दिलाई। 10वें मिनट में रूपिंदर ने दूसरा पेनाल्टी कार्नर तो बेकार कर दिया लेकिन तीन मिनट बाद ही गलती सुधारते हुए तीसरे पेनाल्टी कार्नर को गोल में बदल दिया। 16वें मिनट में नितिन थिमैय्या ने अकेले दम पर गोलकीपर को छकाते हुए तीसरा गोल किया।
चार मिनट बाद ही मंदीप के पास पर धरमवीर ने गोल कर बढ़त 4-0 कर दी। यहां तक तो ठीक था। लेकिन इसके बाद भारतीय टीम बिखरी हुई नजर आई। पहला हॉफ खत्म होने से दो मिनट पहले ओमान को दूसरा पेनाल्टी कार्नर मिला जिस पर मोहम्मद होसैब अल शेख की ड्रैग फ्लिक ने गोल भेद दिया।
दूसरे हॉफ की शुरूआत भी भारतीयों ने तेजी से की। तीन मिनट के अंदर मिले दूसरे पेनाल्टी कार्नर पर रूपिंदर ने गोल कर स्कोर 5-1 किया। दो मिनट बाद छठे पेनाल्टी कार्नर पर वी रघुनाथ ने गोल दागा। फिजी के खिलाफ गोल से चूक गए मंदीप सिंह ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना पहला गोल किया।
7-1 की बढ़त के बाद पूरे 20 मिनट तक भारतीयों को गोल नसीब नहीं हुआ। हालांकि उन्हें गोल के कई मौके मिले। यह सूखा नितिन थिमैय्या ने 63वें मिनट में डी के टॉप से रिवर्स हिट के जरिए गोल कर तोड़ा। नौवां गोल पेनाल्टी कार्नर पर गुरजिंदर सिंह की ड्रैग फ्लिक से आया। इससे पहले बांग्लादेश ने मजबूत चीन को अप्रत्याशित रूप से 3-2 से परास्त किया जबकि आयरलैंड ने फिजी को 13-0 से हराया।