हॉकी समिति को विश्वास है कि वह इस तरह वह इस साल चेन्नई में खेली जाने वाली एशियन चैंपियनशिप ट्रॉफी और और हांगझू में होने वाले एशियन गेम्स में भारतीय हॉकी टीम की मदद कर सकेंगे। भोलानाथ के मुताबिक, भारतीय टीम को अहम मुकाबले हारने और मैच के अंतिम समय में गोल देने की आदत हो गई है, जो काफी समय से टीम मैनेजमेंट को परेशान कर रहा है और वह इसके लिए मजबूत कदम उठाना चाहते हैं।
भोलानाथ ने कहा, "हम किसी भा हाल में भारतीय हॉकी का विकास चाहते हैं। हम ज्यादातर मैच हार रहे हैं। हम मैच के आखिरी मिनट्स में गोल दे देते हैं। यह काफी समय से टीम मैनेजमेंट की परेशानी का कारण बना हुआ है। तो हमने सोचा कि क्यों न अप्टन जैसे दिग्गज को टीम पर काम करने दिया जाए। अप्टन की देखरेख में भारतीय क्रिकेट टीम को विश्व कप 2011 में सफलता मिली थी और वह कई आईपीएल टीम के साथ काम कर चुके हैं, जिसमें दिल्ली डेयरडेविल्स और राजस्थान रॉयल्य जैसी टीमें शामिल हैं। अप्टन को खेल की मांसिकता की अच्छी जानकारी है। हम चाहते हैं कि वह हमारे खिलाड़ियों में भी वही मानसिक मजबूती का विकास करें जो उन्होंने 2011 में विश्व कप में भारतीय क्रिकेट टीम के साथ किया था।"
अप्टन को मेंटल कंडीशनिंग में 20 साल से भी ज्यादा का अनुभव है। वह कई अलग-अलग खेल के बेहतरीन पेशेवर एथलीट के साथ काम कर चुके हैं। भारतीय क्रिकेट टीम के साथ अपने अंतराल में भारत ने टेस्ट रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल किया था। दक्षिण अफ्रीका के अप्टन ने दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेट टीम को भी लगातार कई वर्षों तक तीनों प्ररूपों में विश्व नंबर एक बने रहने में मदद की थी। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका की पुरुष हॉकी टीम, ऑस्ट्रेलियाई हॉकी टीम, भारतीय सुपर लीग में एफसी गोआ और एफसी हैदराबाद, इंग्लैंड की रग्बी टीम और भी कई ऐसी अन्य खेल की टीमों के साथ काम कर चुके हैं।
हॉकी इंडिया का कहना है कि अप्टन अगले साल ओलंपिक तक टीम के साथ काम कर सकते हैं जिससे टीम का एशियन गेम्स में काफी मदद मिलेगी। एशियन गेम्स 23 सितंबर से आठ अक्तूबर तक खेला जाएगा। अप्टन के कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक वह बेंगलुरु में पुरुष और महिला दोनों ही हॉकी टीमों के साथ काम करेंगे। भोलानाथा का कहना है कि अप्टन के कॉन्ट्रैक्ट को बढ़ाने की प्रक्रिया पर एशियन गेम्स के बाद बात की जाएगी।