हॉकी के जादूगर ध्यानचंद के व्यक्तित्व के बारे में बहुत कम लोगों को पता है। वजह यह कि उनके बारे में ज्यादा नहीं लिखा गया। जो भी संस्मरण उनके जीवन के मिलते हैं वह या तो उनके करीबी लोगों ने सुनाएं हैं या फिर परिजनों ने उनके बारे में यह जानकारी दी है। ध्यानचंद हॉकी के महान खिलाड़ी होने के साथ-साथ शायरी के भी आला दर्जे के शौकीन थे। खास बात है कि उन्होंने फिल्मी सितारों पर शायरी लिखी थीं।
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ऑनलाइन मीडिया के अनुसार ध्यानचंद के शायरी के शौक का खुलासा उनकी बहू मीना ने अपनी किताब 'ध्यानचंद की कहानी, अपनों की जुबानी' में किया है। मीना ने कहा कि बाबू जी हॉकी के तो दीवानें थे ही, साथ ही शायरी का भी बहुत शौक रखते थे। उन्होंने अमिताभ बच्चन, हेमा मालिनी, सायरा बानो, जरीना बहाव और रेखा पर शायरी लिखी।
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अमिताभ के बारे में उन्होंने लिखा था कि 'कभी हम उफ, कभी हाय, कभी फरियाद करते हैं, खुदाया क्यों नहीं मिलते जिन्हें हम याद करते हैं'। 1976 के दौर में ध्यानचंद ने यह लिखकर इस शायरी के ऊपर अमिताभ बच्चन लिखा हुआ था। रेखा-शशि कपूर के लिए उन्होंने लिखा था कि 'मुझे इसका गम नहीं है कि बदल गया जमाना, मेरे जिंदगी है तुमसे कहीं तुम बदल न जाना'। हेमामालिनी पर लिखा था-'नाज था जिस पर मुहब्बत में साथ देंगे, गुजरे जब सामने से तो अजबनी से थे।'
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