गोलकीपर और कप्तान सविता ने इन खेलों में अपनी फिटनेस को प्राथमिकता देने के लिए पिज्जा और गोल-गप्पे खाने भी छोड़ दिए। उन्होंने कहा, ‘हमने तय किया है कि फिटनेस के लिए एशियाई खेलों तक कुछ चीजें छोड़ेंगे। मुझे पिज्जा और गोलगप्पे बहुत पसंद हैं, लेकिन मैने प्रण किया है कि अब एशियाई खेलों तक नहीं खाऊंगी। मैं 2009 से 2018 तक बेरोजगार रही, लेकिन परिवार ने पूरा साथ दिया और मैंने अपना खेल प्रभावित नहीं होने दिया।’
हरियाणा की मिडफील्डर नेहा गोयल ने अपनी मां को 800 रुपये के लिए महीने भर साइकिल की फैक्ट्री में दिन-रात मजदूरी करते देखा। उन्होंने कहा कि परिवार को इस हालात से बाहर निकालने के लिए हॉकी का खेल जरिया बना। उन्होंने कहा, ‘स्कूल में जूते और कपड़ों के लिए मैंने हॉकी खेलना शुरू किया था। मेरी मम्मी और हम सभी साइकिल के पहिए पर तार बांधने का काम करते थे और सौ तार बांधने पर तीन रुपये मिलते थे। महीने के 800 या 1000 रुपये मिलते जिससे घर चलता था।
उन्होंने कहा- मुझे अभ्यास के लिए गांव से 10 किलोमीटर दूर जाना पड़ता था और ऑटो के 20 रुपये मांगने में भी शर्म आती थी।’ नेहा को 2015 में रेलवे में नौकरी मिली जिसके बाद उसने बहनों की शादी कराई और अपनी मां का काम करना बंद कराया। नेहा ने कहा, ‘मैंने तय किया है कि एशियाई खेलों तक कोई जंक फूड नहीं खाऊंगी। मुझे पिज्जा पसंद है, लेकिन अब खेलों के बाद ही खाऊंगी।’
ओडिशा की दीप ग्रेस इक्का ने एशियाई खेलों तक मिठाई नहीं खाएंगी। उन्होंने कहा, ‘मुझे मीठा पसंद है, लेकिन अब नहीं खा रही हूं। हम सभी का ध्यान पूरी तरह से एशियाड पर है। मैंने सुंदरगढ़ में हॉकी का गौरव देखा है और ओलंपिक पदक के साथ मैं इसका हिस्सा बनना चाहती हूं। परिवार का, अपने जिले का और देश का नाम रोशन करना चाहती हूं।’