डच कोच पॉल वॉन एस को हटाए जाने के बाद भारतीय हॉकी के लिए मनोचिकित्सक की जरूरत महसूस की जा रही है। कप्तान सरदार सिंह ने हॉकी इंडिया से टीम के लिए मनोचिकित्सक की मांग की है। फेडरेशन ने भी उन्हें जल्द ही मनोचिकित्सक देने की बात कही है।
यही नहीं सरदार ने फ्रांस और स्पेन दौरे पर जाने से पहले स्वीकार किया है कि बार-बार टीम का कोच बदलना ठीक नहीं है। इससे खिलाड़ियों को परेशानी होती है, लेकिन वॉन एस की छुट्टी के बाद टीम की कमान रोलैंट ओल्टमेंस को दिए जाने पर वह खुश हैं।
सरदार तसल्ली जताते हैं कि ओल्टमेंस टीम को पिछले तीन सालों से जानते हैं और खिलाड़ी भी उनसे अच्छी तरह से परिचित हैं। अगर फेडरेशन वॉन एस की जगह किसी नए कोच को लेकर आती तो फिर दिक्कतें खड़ी होतीं। सरदार का कहना है कि टीम को मनोचिकित्सक की जरूरत है।
सरदार को भरोसा, नए कोच से गाली-गलौच नहीं होगी
सरदार सिंह को इस बात पर विश्वास नहीं हो रहा है कि गुरबाज टीम के कोच को अपशब्द कह सकते हैं। उन्हें पूरा विश्वास है कि गुरबाज पर लगाए गए अनुशासनहीनता के आरोप गलत निकलेंगे। जरूरत पड़ने पर वह कमेटी के समक्ष अपना पक्ष भी रखेंगे। सरदार और ओल्टमेंस दोनों टीम में किसी भी तरह की गुटबाजी होने से इंकार करते हैं।
वॉन एस पर बोलने से बचे ओल्टमेंस
पॉल वॉन एस का जिक्र छिड़ते ही ओल्टमेंस साफ बोलते हैं उनका अध्याय समाप्त हो चुका है। हालांकि कोच का लगातार इस तरह से बदला जाना निराशाजनक है, लेकिन उनके पास अभी भी 12 माह पड़े हैं। वह अपनी मांगों के बारे में हॉकी इंडिया से बात कर रहे हैं। उन्हें बचे हुए समय में ज्यादा से ज्यादा मजबूत देशों के साथ दोस्ताना मुकाबले होने चाहिए।
ओल्टमेंस खुलासा करते हैं कि पहले टीम की कमजोरी अंतिम समय में गोल खाने की थी, लेकिन कुछ समय से वह देख रहे हैं कि टीम अंतिम क्वार्टर में बेहतर खेल रही है, लेकिन पहले क्वार्टर में उतना ही खराब खेल रही है।