फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

CWG 2022: राष्ट्रमंडल खेलों में 0.01 सेकेंड से चूकीं हिमा दास, 200 मीटर रेस में नहीं जीत पाईं पदक

Sat, 06 Aug 2022 10:29 AM IST
शक्तिराज सिंह स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, बर्मिंघम

सार

हिमा दास ने सेमीफाइनल मैच में शानदार प्रदर्शन किया और सिर्फ 23.42 सेकेंड में 200 मीटर की रेस पूरी की, लेकिन वो फाइनल में जगह नहीं बना सकीं। वो अपनी हीट में तीसरे स्थान पर रहीं। 
 
विज्ञापन
हिमा दास - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में हिमा दास कोई पदक नहीं जीत पाई हैं। 200 मीटर रेस के फाइनल राउंड में जगह बनाने के लिए उन्हें अपनी हीट की शुरुआती दो एथलीट में शामिल होना था। हिमा दास ने इसके लिए अपना पूरा दम लगाया, लेकिन अंत में वो 0.01 सेकेंड से पीछे रह गईं और फाइनल में जगह नहीं बना सकीं। हिमा ने 200 मीटर रेस के सेमीफाइनल में 23.42 मीटर में अपनी दौड़ खत्म की। हालांकि, वो अपनी हीट में तीसरे स्थान पर रह गईं और फाइनल में जगह बनाने से चूक गईं। ऑस्ट्रेलिया की एला कॉनली ने 23.41 सेकेंड में अपनी रेस खत्म की और दूसरे स्थान पर रहकर फाइनल में जगह बनाई। 
विज्ञापन


हिमा दास देश की सबसे बेहतरीन एथलीट में शामिल हैं। उन्होंने एक महीने में पांच गोल्ड मेडल जीतने का कारनामा किया है। कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में उनकी प्रतियोगिता शुरू होने से पहले ही एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें दावा किया गया था कि हिमा ने कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीत लिया है। हालांकि, वह वीडियो काफी पुराना था। 
विज्ञापन

मुश्किल में बीता हिमा का बचपन
असम के नागौर जिले की रहने वाली हिमा दास का जन्म छोटे से गांव धींग में 9 जनवरी 2000 में हुआ था। हिमा के परिवार में 17 लोग हैं और उनके जन्म के समय पूरा परिवार धान की खेती पर आश्रित था। हिमा का बचपन भी परिवार की मदद करते हुए खेतों में बुआई करते बिता। हिमा बचपन से ही फुटबॉलर बनना चाहती थीं। वह स्कूल में फुटबॉल खेलती थीं। उनकी फुर्ती और खिलाड़ी बनने की चाह को स्कूल के एक टीचर ने भाप लिया और हिमा को एथलेटिक्स में करियर बनाने की सलाह दी। हिमा ने भी टीचर की सलाह को मानते हुए रेस को अपने करियर के तौर पर चुना। 

हिमा के पिता ने गुवाहाटी में उन्हें ट्रेनिंग लेने के लिए भेज दिया। पिता को इस बात की खुशी थी कि अब बेटी को तीन वक्त का खाना अच्छे से मिल सकेगा। हिमा रोजाना गांव से बस लेकर 140 किलोमीटर दूर गुवाहाटी जाती और रात 11 बजे तक घर आती। घर वाले चिंता करने लगे तो हिमा का स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के बगल में ही रहने का इंतजाम कराया गया। उनके पिता ने 1200 जूते अपनी बेटी को दिए। उस समय उनके लिए इतने महंगे जूते खरीदना बड़ी बात थी। हालांकि, इसके बाद हिमा ने अपनी महेनत से सब कुछ बदला और 2018 में उसी जूते की कंपनी की एंबेसडर बन गईं। आने वाले समय में हिमा दास से और भी कई पदकों की उम्मीद होगी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें