'क्यू' में दिखी अपनी पहचान
क्विंसी के लिए टेेकबॉल सिर्फ एक नया खेल नहीं था। उन्हें इसके लोगो में मौजूद 'Q' अक्षर में भी अपनी एक पहचान नजर आई। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, 'मैंने यह बात किसी को नहीं बताई, लेकिन टेेकबॉल के लोगो में जो 'Q' है, मुझे लगता है कि वह क्विंसी है। इसलिए मुझे लगता है कि यह खेल मेरे लिए ही है।' मुंबई में कुछ खेल प्रेमियों के छोटे से समूह के साथ उन्होंने टेकबॉल की शुरुआत की। इसके बाद वह बंगलूरू चली गईं। अब वह खेल उपकरण बनाने वाली कंपनी डेकाथलॉन में टेस्ट इंजीनियर के तौर पर काम करती हैं और टेेकबॉल क्लब ऑफ बंगलूरू में प्रशिक्षण लेती हैं।
हालांकि, उनका लक्ष्य सिर्फ खुद आगे बढ़ना नहीं था। उन्होंने बंगलूरू में टेकबॉल क्लब की स्थापना की और युवा खिलाड़ियों के साथ काम करना शुरू किया। उनके साथ प्रशिक्षण लेने वाले दो खिलाड़ी एशियन यूथ गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व भी कर चुके हैं। सात बार की राष्ट्रीय चैंपियन क्विंसी अब भारत में इस खेल को आगे बढ़ाने वाले शुरुआती खिलाड़ियों में शामिल हैं।
फुटबॉल ने दिया आधार, टेकबॉल ने सिखाया धैर्य
क्विंसी का मानना है कि फुटबॉल की पृष्ठभूमि ने टेकबॉल में उन्हें कुछ फायदा दिया। इस खेल में हाथों का इस्तेमाल नहीं किया जाता और खिलाड़ी पैर, घुटने, छाती और सिर से गेंद को घुमावदार टेबल पर नियंत्रित करते हैं। उन्होंने कहा, 'फुटबॉल खिलाड़ियों को थोड़ा फायदा होता है क्योंकि इसमें आप हाथों का इस्तेमाल नहीं करते। इसलिए आप अपने पैरों का इस्तेमाल अपने आप ज्यादा करने लगते हैं।' हालांकि, फुटबॉल की तकनीक के साथ टेेकबॉल में आगे बढ़ने के लिए धैर्य भी जरूरी था। खासकर तब, जब भारत में इस खेल के खिलाड़ियों को लंबे समय तक आर्थिक सहायता नहीं मिली।
चार साल तक खुद उठाया खर्च
क्विंसी ने बताया कि पिछले चार वर्षों से खिलाड़ियों को फंडिंग नहीं मिली। ऐसे में खिलाड़ियों को अपनी नौकरी से मिलने वाले पैसे से ही टूर्नामेंट का खर्च निकालना पड़ा। उन्होंने कहा, 'पिछले चार साल से हमें फंड नहीं मिला है। हम फुल टाइम काम करते हैं और उसी पैसे को टूर्नामेंट के लिए बचाते हैं।'
एशियन गेम्स का अनुभव उनके लिए इसलिए भी खास रहा क्योंकि इस बार भारतीय ओलंपिक संघ और टीम की ओर से खिलाड़ियों के खर्च और जरूरी व्यवस्थाओं का इंतजाम किया गया था। क्विंसी ने कहा, 'इस बार जब आईओए और टीम की ओर से सब कुछ प्रायोजित था और हमारे लिए सब कुछ तैयार था, तो यह अनुभव बहुत भावुक कर देने वाला है।'