कॉमनवेल्थ और एशियाई पैरा खेलों में तैराकी में पदक जीत चुके प्रशांत कर्माकर ने मंगलवार को पहली बार साइकिलिंग में हाथ आजमाया। एशियाई पैरा साइकिलिंग में अपने पहले ही प्रयास में उन्होंने दो गोल्ड मेडल अपने नाम किए। इस विकलांग एथलीट ने एमसी-5 कैटेगरी में 10 किलोमीटर टाइम ट्रायल व 40 किलोमीटर रोड रेस में स्वर्ण जीते।
अपने इस प्रदर्शन पर प्रशांत खुद हैरान हैं। उनका कहना है कि उन्हें खुद उम्मीद नहीं थी कि वह रेस पूरी भी कर पाएंगे या नहीं। तीन माह पहले साइकिलिंग शुरू करने वाले प्रशांत ने एकमात्र लक्ष्य रेस पूरा करने का रखा था। लेकिन रेस पूरी कर गोल्ड जीतने के बाद उनकी हालत ऐसी हो गई थी कि वह खड़े भी नहीं हो पा रहे थे।
उन्होंने बताया कि अगर साइकिलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने उन्हें साइकिल उपलब्ध नहीं कराई होती तो वह इस चैंपियनशिप में कुछ खास नहीं कर पाते। उन्होंने दोनों ही रेसों में सचिन वर्मा को पीछे छोड़ा।
वहीं सीएफआई के सेक्रेटरी जनरल ओंकार सिंह ने बताया कि भारत सरकार की ओर से ईरान को वीजा जारी कर दिया गया है। लेकिन इसमें काफी देर हो गई है अभी यह तय नहीं हो पाया है कि ईरान अपनी टीम लेकर इस चैंपियनशिप में आ रहा है या नहीं। कुछ यही हाल पाकिस्तान और अफगानिस्तान के साथ भी है। इन दोनों देशों को तो अभी तक वीजा भी नहीं मिला है।