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FIFA: 2030 विश्व कप की विश्वसनीयता पर क्यों मंडरा रहा संकट? यूरोपीय मानवाधिकार संस्था ने फीफा से मांगा जवाब

Sun, 19 Jul 2026 05:47 PM IST
मयंक त्रिपाठी स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, जिनेवा

सार

यूरोप की शीर्ष मानवाधिकार संस्था काउंसिल ऑफ यूरोप ने 2030 फीफा विश्व कप की निष्पक्षता पर चिंता जताते हुए फीफा से पारदर्शी और मजबूत इंटीग्रिटी फ्रेमवर्क बनाने की अपील की है। संस्था ने बालोगुन मामले, राजनीतिक हस्तक्षेप और सट्टेबाजी से जुड़े प्रायोजन को खेल की विश्वसनीयता के लिए खतरा बताया है।

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फीफा विश्व कप 2026 - फोटो : @FIFAcom
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विस्तार
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यूरोप की शीर्ष मानवाधिकार संस्था काउंसिल ऑफ यूरोप ने 2030 फीफा विश्व कप की निष्पक्षता (इंटीग्रिटी) पर गंभीर सवाल उठाते हुए फीफा से टूर्नामेंट के लिए अधिक मजबूत और पारदर्शी व्यवस्था बनाने की अपील की है। संस्था ने कहा कि यदि खेल के नियम राजनीतिक और आर्थिक दबाव में बदलते हैं तो विश्व कप की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। काउंसिल ऑफ यूरोप के महासचिव अलैन बेरसेट ने रविवार को स्पेन और अर्जेंटीना के बीच खेले गए विश्व कप फाइनल से कुछ घंटे पहले फीफा को एक खुला पत्र लिखा। उन्होंने कहा कि फुटबॉल के सामने अगला बड़ा संकट पैसा और सत्ता है।
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बालोगुन मामले का किया जिक्र
बेरसेट ने अमेरिकी खिलाड़ी फोलारिन बालोगुन का उदाहरण देते हुए कहा कि फीफा ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव के बाद उन पर लगाया गया एक मैच का प्रतिबंध बीच टूर्नामेंट में निलंबित कर दिया। इससे नियमों की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए। उन्होंने लिखा, 'जब नियम दबाव में झुकते हैं तो हर नतीजा संदेह के घेरे में आ जाता है। राजनीतिक प्रभाव अब मैदान तक पहुंच चुका है।' बालोगुन को बेल्जियम के खिलाफ क्वार्टर फाइनल से पहले खेलने की अनुमति दी गई थी, हालांकि उनकी टीम को उस मुकाबले में 4-1 से हार का सामना करना पड़ा।

सट्टेबाजी प्रायोजन पर भी चिंता
बेरसेट ने फीफा द्वारा अप्रैल में भविष्यवाणी आधारित बेटिंग (प्रेडिक्शन मार्केट) कंपनी एडीआई प्रिडिक्टस्ट्रीट को विश्व कप का प्रायोजक बनाए जाने पर भी सवाल उठाए। रिपोर्ट के अनुसार यह करार करीब 15 करोड़ डॉलर का है और कंपनी समझौते से केवल एक सप्ताह पहले ही स्थापित हुई थी। उन्होंने कहा कि इस तरह की सट्टेबाजी में मैच के अंतिम नतीजे के बजाय पास, कॉर्नर, कार्ड जैसी छोटी-छोटी घटनाओं पर भी दांव लगाया जा सकता है, जिससे अंदरूनी जानकारी के दुरुपयोग और मैच से जुड़ी धोखाधड़ी का खतरा बढ़ जाता है। बेरसेट ने कहा, 'यह धोखाधड़ी के लिए खुला दरवाजा है और इस विश्व कप ने उस दरवाजे को और चौड़ा कर दिया है।'
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रेफरी, नस्लीय टिप्पणियों और पारदर्शिता पर भी सवाल
काउंसिल ऑफ यूरोप ने अपने पत्र में रेफरी के अधिकारों पर उठते सवाल, खिलाड़ियों के खिलाफ नस्लीय टिप्पणियों और टूर्नामेंट में बढ़ते सट्टेबाजी प्रभाव को भी चिंता का विषय बताया। बेरसेट ने कहा कि बीच टूर्नामेंट में बिना विस्तृत कारण बताए प्रतिबंध हटाने जैसे फैसले पारदर्शिता और खेल के नियमों की विश्वसनीयता को कमजोर करते हैं।

यूईएफए भी जता चुका है नाराजगी
यूरोपीय फुटबॉल महासंघ भी बालोगुन मामले में फीफा की कार्रवाई की आलोचना कर चुका है। यूईएफए ने इसे फुटबॉल के कानून और पारदर्शिता के लिए "रेड लाइन पार करने" जैसा बताया था। हालांकि फीफा ने अब तक इस फैसले के पीछे का विस्तृत कारण सार्वजनिक नहीं किया है।

2030 विश्व कप के लिए संवाद का प्रस्ताव
अलैन बेरसेट ने फीफा से अपील की कि 2030 विश्व कप शुरू होने से पहले ही एक साझा कार्य-प्रणाली तैयार की जाए ताकि टूर्नामेंट की निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा, 'मेरा प्रस्ताव है कि आज से ही फीफा के साथ ऐसा संवाद शुरू किया जाए, जिससे 2030 विश्व कप के लिए मजबूत इंटीग्रिटी फ्रेमवर्क तैयार किया जा सके।'

2030 विश्व कप की मेजबानी
2030 फीफा विश्व कप का आयोजन मुख्य रूप से स्पेन, पुर्तगाल और मोरक्को में होगा। वहीं शताब्दी वर्ष के अवसर पर उरुग्वे, अर्जेंटीना और पैराग्वे में भी एक-एक उद्घाटन मैच आयोजित किए जाने की योजना है।
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