भ्रष्टाचार के दलदल में फंसी फीफा की एथिक्स कमेटी ने फुटबॉल की नियामक संस्था के अध्यक्ष सैप ब्लाटर के अलावा महासचिव जेरोम वोल्के और यूईएफए के अध्यक्ष माइकल प्लातिनी को 90 दिनों के लिए अस्थायी तौर पर निलंबित कर दिया है।
वर्ष 1998 से फीफा के अध्यक्ष ब्लाटर और प्लातिनी पर फीफा के हितों की अनदेखी करने के आरोप हैं। फीफा की स्वतंत्र एथिक्स कमेटी ने दक्षिण कोरिया के चुंग मोंग जून को छह साल के लिए प्रतिबंधित भी कर दिया है। उन पर एक लाख स्विस फ्रेंक का जुर्माना भी किया गया है।
एथिक्स कमेटी के फैसले से ब्लाटर के बाद फ्रांस के पूर्व दिग्गज फुटबॉलर प्लातिनी के नए फीफा अध्यक्ष बनने की उम्मीदें भी खत्म हो गई हैं। अस्थायी निलंबन 90 दिनों का है जोकि जनवरी में समाप्त होगा। उसके बाद इसे 45 दिन के लिए और बढ़ाया जा सकता है।
अगर ऐसा होता है तो फिर यह 26 फरवरी से पहले समाप्त होगा जबकि फीफा अध्यक्ष पद का चुनाव होना है। इससे प्लातिनी की नया अध्यक्ष बनने की संभावनाओं को करारा झटका लगा है।
फरवरी में होगा फीफा के अध्यक्ष का चुनाव
पिछले महीने स्विट्जरलैंड के जांचकर्ताओं ने ब्लाटर के खिलाफ आपराधिक जांच शुरू की थी। जबकि महासचिव जेरोम वोल्के टिकट स्कैंडल मामले में पहले ही हटा दिए गए थे। वक्तव्य में कहा गया है कि अस्थायी निलंबन तत्काल प्रभाव से लागू होगा। फरवरी में होगा फीफा अध्यक्ष का चुनाव।
फुटबॉल के ये चारों ताकतवर लोग अब अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर खेल की गतिविधियों में शामिल नहीं हो सकेंगे। हालांकि फीफा की ओर से अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि नियामक संस्था का संचालन अब कौन करेगा।
ब्लाटर और प्लातिनी की मुश्किलें तभी शुरू हो गईं थी जब प्लातिनी को 2011 में मिले दो मिलियन डॉलर के भुगतान का मामला आपराधिक जांच के दायरे में आ गया था। इस भुगतान को गैर वाजिब करार दिया गया था। जबकि मीडिया रिपोर्टों में प्लातिनी आरोपों से इनकार करते रहे हैं उनका कहना है कि यह फीफा की ओर से उनका वाजिब भुगतान है। उन्होंने इसको लेकर जांच की मांग की है।