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VAR से टूटा क्रोएशिया का हौसला, पूर्व खिलाड़ियों ने पेनल्टी पर जमकर निकाली भड़ास

Mon, 16 Jul 2018 03:29 AM IST
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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वीएआर
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वीडियो असिस्टेंट रेफरी (VAR) प्रणाली विश्व कप फाइनल के दौरान गहन जांच के अंतर्गत आई, क्योंकि इस तकनीक की मदद से फ्रांस को पेनल्टी मिली और वह क्रोएशिया पर 2-1 की बढ़त बनाने में कामयाब हो गया। 

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रेफरी नेस्टर पिटाना ने वीएआर स्क्रीन के सामने कई मिनट गुजारे और यह पता करने की कोशिश की थी कि इवान पेरिसिच ने वाकई हैंडबॉल किया है। गेंद उनके हाथ पर जरूर लगी, लेकिन वह बहुत खिंचा हुआ था। गेंद बॉक्स से बाहर भी जा रही थी।

जहां क्रोएशियाई खिलाड़ी का यह प्रयास जानबूझकर करने वाला नहीं लगा वहीं पिटाना ने फैसला किया कि उनका हाथ अनैसर्गिक स्थान पर था और फ्रांस को पेनल्टी दे दी। एंटोनी ग्रीजमैन ने इस पर गोल किया और हाफ टाइम से पहले फ्रांस ने 2-1 की बढ़त बना ली।

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रेफरी पर इस तरह भड़के फुटबॉल एक्सपर्ट्स

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अर्जेंटीना के ऑफिशियल के फैसले का कई लोगों ने समर्थन किया, लेकिन पूर्व खिलाड़ियों, मैनेजर्स और पत्रकारों के अगुआ जो बार्टन का मानना है कि नेस्टर ने गलत फैसला किया। 

फ्लीटवुड टाउन के मौजूदा मैनेजर बार्टन ने ट्विटर पर लिखा, 'अगर आप सोचते हैं कि यह पेनल्टी है तो या तो आप फ्रेंच हैं या फिर आपने कभी फुटबॉल नहीं खेला। एक शानदार मैच को बर्बाद कर सकता था यह फैसला। कैसे पेरिसिच वहां से हटता? उम्मीद है कि यह महत्वपूर्ण पल न हो।

वहीं एक टीवी एक्सपर्ट रॉय कीन ने कहा कि इस पेनल्टी ने मुझे झकझोर कर रख दिया है। यह बहुत ही अपमानजनक फैसला है। मैनचेस्टर यूनाइटेड के पूर्व कप्तान रॉय कीन ने कहा, 'इस पेनल्टी के फैसले ने मुझे हैरान कर दिया। क्रोएशियाई खिलाड़ी इससे अच्छे प्रदर्शन के हकदार हैं। मुझे बहुत गुस्सा आ रहा है। यह बहुत ही खराब फैसला है।'
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VAR नहीं, रेफरी की आलोचना कीजिए

वीएआर
वहीं जैमी कारागर ने ध्यान दिलाया कि वीएआर प्रणाली की आलोचना करने की जरूरत नहीं है, लेकिन रेफरी की आलोचना की जा सकती है, जिन्होंने यह फैसला लिया। उन्होंने लिखा, 'रेफरी की गलती है वीएआर की नहीं! वीएआर तो सिर्फ घटना का रीप्ले है।'

हालांकि, यह मैच विजयी घटना साबित नहीं हुई, लेकिन कई फुटबॉल एक्सपर्ट्स इसे मैच का टर्निंग पॉइंट मान रहे हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक उस गोल ने क्रोएशिया के हौसले पस्त कर दिए। इसके बाद दूसरे हाफ में वह बराबरी करने के लिए अपनी रणनीतियों में बदलाव करती रही, जिसकी वजह से फ्रांस को गोल करने के आसान मौके मिले। क्रोएशिया और फ्रांस के बीच बराबर की टक्कर देखने को मिलती तो ज्यादा मजा आता।
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