13 दिसंबर का दिन कोलकाता के सॉल्ट लेक स्टेडियम के लिए कभी न भूलने वाला बन गया। इस दिन फुटबॉल जगत के सबसे बड़े सितारों में से एक लियोनल मेसी पहली बार कोलकाता में मैदान पर उतरे। हजारों की संख्या में फैंस स्टेडियम पहुंचे थे। लोगों ने सिर्फ मेसी की एक झलक पाने के लिए भारी-भरकम टिकट कीमतें चुकाईं, लेकिन जो उम्मीद लेकर आए थे, वही सबसे बड़ी निराशा में बदल गई। मेसी मैदान पर सिर्फ कुछ मिनट ही मौजूद रह सके, जिसके बाद उन्हें सुरक्षा कारणों से स्टेडियम से बाहर ले जाया गया। इसके बाद हालात तेजी से बिगड़ते चले गए।
मैदान में उतरते ही घिर गए मेसी
जैसे ही लियोनल मेसी मैदान में आए, उन्हें देखने के लिए 100 से ज्यादा लोग एक साथ उनकी ओर दौड़ पड़े। इनमें कई राजनीतिक नेता, गणमान्य व्यक्ति और सुरक्षा कर्मी भी शामिल थे। सुरक्षा घेरा पूरी तरह टूट चुका था। स्टेडियम में मौजूद दर्शकों को दूर से भी मेसी ठीक से नजर नहीं आए। यही वजह रही कि फैंस का गुस्सा बढ़ता चला गया और स्थिति बेकाबू होने लगी। हालात ऐसे बन गए कि आयोजकों को मेसी को मैदान से बाहर ले जाने का फैसला लेना पड़ा।
'शुरुआत में मेसी काफी सहज थे'
इस पूरे घटनाक्रम पर पूर्व भारतीय मिडफील्डर लालकमल भौमिक ने बड़ा खुलासा किया। भौमिक उस प्रदर्शनी मैच का हिस्सा थे, जो मोहन बागान मेसी XI और डायमंड हार्बर मेसी XI के बीच खेला गया था। स्पोर्ट्स नाउ से बात करते हुए भौमिक ने बताया, 'जब मेसी स्टेडियम में आए, तब सब कुछ बिल्कुल ठीक था। वह काफी सहज थे, मुस्कुरा रहे थे और हम सभी से हाथ मिला रहे थे। उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के ऑटोग्राफ भी दिए।'
भीड़ बढ़ी, बदला मेसी का हावभाव
यह शांति ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी। जैसे ही मैदान पर लोगों की संख्या बढ़ने लगी और हर कोई तस्वीरें खींचने के लिए आगे आने लगा, मेसी असहज महसूस करने लगे। भौमिक ने आगे कहा, 'जैसे ही बहुत ज्यादा लोग मैदान पर घुस आए और फोटो लेने लगे, मेसी साफ तौर पर असहज दिखने लगे।' स्थिति तेजी से बिगड़ती चली गई।
'मेसी चिड़चिड़े हो गए, नियंत्रण खो बैठी व्यवस्था'
लालकमल भौमिक के मुताबिक, भीड़ अचानक बेकाबू हो गई और इसका असर मेसी के व्यवहार पर साफ दिखने लगा। उन्होंने कहा, 'बहुत जल्दी मैदान पर जरूरत से ज्यादा भीड़ हो गई। हम सब देख सकते थे कि हर कोई उनके आसपास फोटो खींच रहा था और मेसी का रिएक्शन बदल रहा था। वह चिड़चिड़े हो गए, उनका सब्र जवाब देने लगा और हालात पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो गए।'
सुरक्षा टीम और साथी खिलाड़ी भी नाराज
पूर्व भारतीय फुटबॉलर ने यह भी बताया कि इस अव्यवस्था से सिर्फ मेसी ही नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा टीम, लुइस सुआरेज़ और रोड्रिगो डी पॉल भी खुश नहीं थे। इंटर मियामी के ये दोनों खिलाड़ी भी मेसी के साथ GOAT टूर ऑफ इंडिया का हिस्सा हैं। भौमिक के मुताबिक, खराब प्रबंधन और सुरक्षा में चूक के चलते ही आयोजन को बीच में रोकना पड़ा।
निराश फैंस और अधूरा सपना
जिन प्रशंसकों ने जीवन में एक बार अपने हीरो को देखने का सपना देखा था, उन्हें भारी निराशा हाथ लगी। मेसी का यह दौरा उत्सव बनने की बजाय अव्यवस्था और अफसोस की कहानी बनकर रह गया। कोलकाता का सॉल्ट लेक स्टेडियम, जिसने कभी फुटबॉल के ऐतिहासिक पल देखे हैं, उस दिन एक ऐसे आयोजन का गवाह बना, जहां उम्मीदें, भावनाएं और इंतजाम, तीनों बिखर गए।