इशान के पिता ने बताया कि उनके बेटे की बचपन से ही इस खेल में रुचि थी। इशान ने दस साल से भी कम उम्र में फुटबॉल खेलना शुरू किया था। कुछ ही सालों में वह काफी अच्छा फुटबॉल खेलने लगा और महाराष्ट्र में चलने वाली '
लिवरपूल' की एकेडमी में भी सिलेक्ट हो गया।
इसके बाद इशान ने दिल्ली की जूनियर फुटबॉल टीम का भी प्रतिनिधित्व किया। उनके पिता ने बताया कि फुटबॉल के प्रति इशान की दीवानगी इस कदर थी कि उन्होंने 11वीं क्लास से स्कूल जाना ही छोड़ दिया था। अब वह अपना ध्यान सिर्फ फुटबॉल की तरफ लगाना चाहते हैं।