खराब फिनिशिंग और लचर रक्षण के चलते भारतीय टीम का दक्षिण एशियाई फुटबॉल फेडरेशन (सैफ)कप में आठवीं बार खिताब जीतने का सपना टूट गया। फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम को मालदीव के हाथों 1-2 से हार का सामना करना पड़ा।
गत चैंपियन भारतीय टीम के खिलाड़ियों का गेंद पर कब्जा भी ज्यादा रहा था और उन्होंने लक्ष्य पर निशाने भी अधिक लगाए, लेकिन मालदीव ने मिले चुनींदा मौकों को भुनाकर विजेता ट्रॉफी पर कब्जा कर लिया। मालदीव का दूसरा खिताब है इससे पहले टीम 2008 में अपनी संयुक्त मेजबानी में चैंपियन बनी थी।
मालदीव के लिए इब्राहिम महुदी हुसैन ने 19वें और अली फासिर ने 66वें मिनट में गोल किए जबकि भारत की ओर से एकमात्र गोल इंजरी टाइम (90+2) में सुमित पासी ने की। भारतीय टीम की ओर से केवल एक खिलाड़ी को छोड़कर बाकी सभी अंडर-23 आयुवर्ग के थे। अगर भारतीय टीम यह खिताब जीतने में सफल हो जाती तो यह उसका लगातार तीसरा खिताब होता।
ग्रुप मैच में भारतीय टीम ने मालदीव को आसानी से 2-0 से परास्त किया था लेकिन फाइनल में फारवर्ड खिलाड़ी सही निशाने नहीं लगा सके लेकिन रक्षक खिलाड़ियों के बीच सही तालमेल की कमी रही।
कोच स्टीफन कांस्टेटाइन की टीम ने टूर्नामेंट में अपना सबसे खराब खेल फाइनल में दिखाया। पहले तीन मैचों में तो इस टूर्नामेंट में भारतीय टीम के खिलाफ एक ही गोल हुआ था। इससे पहले भारतीय टीम कभी सैफ कप फाइनल में पहुंचने के बाद हारी नहीं थी।