भारत की मजबूत रक्षा पंक्ति ने शनिवार को लगातार आक्रमण पर उतारू मेजबान चीन के खिलाफ ऐतिहासिक मुकाबला गोलरहित बराबरी पर रोक लिया। दोनों टीमें 21 साल के बाद अंतरराष्ट्रीय मैत्री मैच में आमने-सामने थी। विश्व के दो सबसे आबादी वाले देशों के बीच हुए यहां मुकाबला काफी कड़ा रहा।
हालांकि चीन का ही भारी रहा और ज्यादातर गेंद उसके खिलाड़ियों के कब्जे में रही लेकिन उसके स्ट्राइकर गोल करने में सफल नहीं हो सके। भारतीय खिलाड़ियों में कप्तान संदेश झिंगान, नारायण दस, प्रीतम कोटल और शुभाशीष बोस ने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन किया। मेजबान टीम को तीन बेहतरीन मौके मिले थे लेकिन भारतीय गोलकीपर गुरप्रीत सिंह संधू गोलपोस्ट में दीवार की तरह खड़े थे। उन्होंने चार बेहतरीन बचाव किए। चीन के स्टार खिलाड़ी गाओ लिन का निशाना कई बार लक्ष्य से भी भटका।
यह पहली बार है कि जब भारत ने एशियाई उपमहाद्वीप की चीन जैसी शीर्ष टीम को उसके अपने मैदान पर जीत हासिल करने से रोका है। भारतीय टीम पहली बार चीन के खिलाफ उसके मैदान पर खेल रही थी। मुकाबले के दौरान कई बार भारतीय स्ट्राइकर गोल करने के भी करीब पहुंचे थे। भारत को दोनों हाफ में प्रीतम कोटल और स्थानापन्न फारुख चौधरी की मदद से एक-एक अच्छा मौका मिला था।
भारत को रैंकिंग में मिल सकता है फायदा
इस मुकाबले को गोलरहित बराबरी पर रोकना का भारतीय टीम को रैंकिंग में फायदा मिल सकता है। भारत फिलहाल 97वें पायदान पर है जबकि चीन की टीम 76वें स्थान पर मौजूद है। चीन की टीम के कोच 2006 की विश्व कप विजेता इटली टीम के प्रशिक्षक रहे मार्सेलो लिप्पी हैं लेकिन पिछले तीन मैचों से चीन की टीम कोई भी गोल नहीं कर पाई है। पिछले महीने चीन को कतर के हाथों 0-1 से पराजित होना पड़ा था जबकि इससे पहले बहरीन के खिलाफ उसने गोलरहित ड्रॉ खेला था। जून में जरूर उसने थाईलैंड को 2-0 से हराया था।