भ्रष्टाचार के आरोपों में बुरी तरह जकड़ी फीफा अब इस मकड़जाल में और भी फंसती नजर आ रही है। विश्व फुटबॉल की नियामक संस्था के अध्यक्ष ब्लाटर के अचानक दिए इस्तीफे के 48 घंटे के अंदर फीफा के एक पूर्व कार्यकारी सदस्य ने बुधवार को यह स्वीकार कर सनसनी फैला दी है कि 1998 और 2010 के विश्व कप का मेजबान चुनने की प्रक्रिया में रिश्वत ली गई थी।
अमेरिकी करोड़पति और फीफा के पूर्व कार्यकारी सदस्य चक ब्लेजर ने बुधवार को अदालत में कबूला है कि उन्होंने 1998 और 2010 विश्व कप का मेजबान चुनने की प्रक्रिया में साथी फीफा अधिकारियों के साथ मिलकर रिश्वत ली थी।
दो दशक से ज्यादा समय तक उत्तरी अमेरिका का फुटबॉल चेहरा रहे ब्लेजर को धोखाधड़ी का दोषी करार दिया गया है। फीफा में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही अमेरिकी जांच में ब्लेजर की गवाही बेहद महत्वपूर्ण है।
सत्तर साल के खेल प्रशासक ने धोखाधड़ी के आरोपों को स्वीकार किया है। उन्हें सजा का इंतजार है और अन्य खेल कार्यकारियों के मामले में उन्हें गवाही के लिए बुलाया जा सकता है।
धोखाधड़ी के सबसे गंभीर आरोप में उन्हें अधिकतम 20 साल की सजा हो सकती है। हालांकि ब्लेजर के सह-आरोपी बनाए गए फीफा कार्यकारियों के नामों का अभी खुलासा नहीं किया गया है। 1998 के विश्व कप का आयोजन फ्रांस में हुआ था जबकि मोरेक्को इस दौड़ में पिछड़ गया था।
अदालत के अन्य दस्तावेजों के अनुसार जब मोरेक्को में एक सह-आरोपी ने रिश्वत ली तब ब्लेजर उपस्थित थे। ब्लेजर ने स्वीकारा कि 2010 में होने वाले विश्व कप के लिए दक्षिण अफ्रीका के चयन में भी पैसा लेने के लिए सहमत थे।
हालांकि दक्षिण अफ्रीका ने कड़ाई से अमेरिकी जांचकर्ताओं के आरोपों को नकारा है कि उन्होंने मेजबानी के अधिकार सुरक्षित करने के लिए दस मिलियन डॉलर की रिश्वत दी थी।
ब्लेजर ने तो यह भी कबूला है कि कॉनकाकैफ के तहत आने वाली टीमों को 1996, 1998, 2000, 2002 और 2003 गोल्ड कप टूर्नामेंट के प्रसारण अधिकार के लिए भी पैसे लिए गए थे। टैक्स चोरी सहित अन्य मामलों में आरोपी ब्लेजर को स्वास्थ्य कारणों पर जमानत पर रिहा किया गया।