इसके बाद जिदान को रेफरी ने रेड कार्ड दिखाया था और फ्रांस की टीम यह विश्व कप हार गई थी। इसी हेडबट की पांच मीटर यानी 16 फीट लंबी ब्रॉन्ज की मूर्ति बनाई गई, जिसमें जिदान के मातेराज्जी को मारे गए किक को दर्शाया गया है। इसे 2013 में दोहा के 'सी फ्रंट' पर चार हफ्तों के लिए लगाया भी गया था।
हालांकि, कुछ विवाद के बाद इसे हटा लिया गया था। अब इस साल होने वाले फीफा वर्ल्ड के लिए इस मूर्ति को फिर से लगाने की तैयारी की जा रही है। कतर के प्रमुख शेखा अल-मायासा बिंत हमद बिन खलीफा अल थानी ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य और तनाव से निपटने की सीख देती इस मूर्ति को दोहा के नए अंतरराष्ट्रीय खेल संग्रहालय में लगाया जाएगा।
अल थानी ने कहा- यह पब्लिक आर्ट के अलावा कुछ नहीं है। यह महसूस किया गया कि सी फ्रंट पर लगाना सही नहीं होगा, इसलिए इस मूर्ति को फिर से स्थापित किया जा रहा है। हम इसे 3-2-1 संग्रहालय में फिर से स्थापित करने की योजना बना रहे हैं। जिदान कतर के अच्छे दोस्त हैं। इसके साथ ही वह अरब के लिए एक आदर्श भी हैं।
शेख ने कहा जिन चीजों को हम कला के माध्यम से लोगों को सिखाने और सशक्त बनाने की कोशिश कर रहे हैं उनमें से एक जीवन के बारे में तथ्य है। इसलिए जिनेदिन जिदान की इस मूर्ति के जरिए हम एथलीटों को तनाव से निपटने की सीख देंगे। संग्रहालय के अधिकारियों का कहना है कि 21 नवंबर को वर्ल्ड कप के शुरू होने के साथ ही इस मूर्ति के प्रदर्शित किया जाएगा।
अल्जीरिया में जन्मे फ्रांसीसी कलाकार एडेल अब्देस ने हेडबट वाली मूर्ति को बनाया था। 2013 में मूर्ति के स्थापित होने के बाद इससे कुछ रूढ़िवादी लोग नाराज हो गए थे। इसके बाद एक सोशल मीडिया अभियान चलाया गया था, जिसमें लोगों ने मूर्ति लगाने के फैसले की निंदा की थी। इस पर अल थानी ने कहा था कि कला का अक्सर विरोध होता है। शुरुआत में कुछ लोग इसकी आलोचना करते हैं, लेकिन फिर इसे स्वीकार भी कर लेते हैं।
कतर ने पिछले दो दशकों में नए संग्रहालयों और कला पर करोड़ों डॉलर खर्च किए हैं। विश्व कप के लिए भी कतर एक बड़ा अभियान चलाने की योजना बना रहा है। फीफा विश्व कप 2022 के लिए 1.4 मिलियन लोगों के दोहा पहुंचने की उम्मीद है।